आईटी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का मसौदा जारी किया

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Highlights

  • आईटी कानून, 2000 को इलेक्‍ट्रोनिक लेन-देन को प्रोत्‍साहित करने, ई-कॉमर्स और ई-ट्रांजेक्‍शन के लिए कानूनी मान्‍यता प्रदान करने, ई-शासन को बढ़ावा देने, साइबर अपराधों को रोकने तथा सुरक्षा संबंधी कार्य प्रणाली और प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने के लिए अमल में लाया गया था।

  • यह कानून 17 अक्‍तूबर, 2000 को लागू किया गया।

  • संसद के मानसून सत्र 2018 में ‘‘सोशल मी‍डिया प्‍लेटफॉर्म के दुरुपयोग और फेक न्‍यूज के प्रसार’’ पर राज्‍य सभा में ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव पर चर्चा को मंजूरी दी गई थी।

IT Act

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत उपयोग रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में संशोधन की योजना बनाई है। संसद के मानसून सत्र 2018 में ‘‘सोशल मी‍डिया प्‍लेटफॉर्म के दुरुपयोग और फेक न्‍यूज के प्रसार’’ पर राज्‍य सभा में ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव पर चर्चा को मंजूरी दी गई थी।

मसौदे को जारी करने का कारण:

फेक न्‍यूज/वॉट्सऐप और अन्‍य सोशल मीडिया साइटों के जरिये फैलाई गई अफवाहों के कारण 2018 में भीड़ द्वारा घेरकर मारने की अनेक घटनाएं हुई हैं।
अपराधियों और राष्‍ट्र विरोधी तत्‍वों द्वारा सोशल मीडिया के दुरूपयोग के मामलों ने कानून प्रवर्तन ए‍जेंसियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसमें आतंकवादियों की भर्ती के लिए प्रलोभन, अश्‍लील सामग्री का प्रसार, वैमनस्‍य फैलाना, हिंसा भड़काना, फेक न्‍यूज आदि शामिल हैं।
संशोधन के नए मसौदे के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तथा मैसेंजर सेवा प्रदान करने वाले एप्स को ऐसी ‘व्यवस्था’ करनी होगी जिसके द्वारा गैरकानूनी सामग्री की ‘‘पहचान’’ की जा सके और उन पर अंकुश लगाया जा सके।

प्रमुख तथ्य:

सरकार भारत के संविधान में प्रदत्‍त अपने नागरिकों को बोलने और अभिव्‍यक्ति तथा निजता की आजादी देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार सोशल नेटवर्क प्‍लेटफॉर्म में आने वाली सामग्री को निय‍ंत्रित नहीं करती। इन सोशल नेटवर्क प्‍लेटफॉर्मों की जरूरत हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 के अनुच्‍छेद 79 में प्रदत्‍त ऐसी कार्रवाई, जिसमें प्रस्‍तावित बि‍क्री, खरीद, ठेके आदि के बारे में उपयुक्‍त और विश्‍वसनीय जानकारी एकत्र करने और पेशेवर सलाह देने के लिए आवश्‍यक है। इसमें अधिसूचित नियम सुनिश्चित करते है कि उनके मंच का इस्‍तेमाल आतंकवाद, उग्रवाद, हिंसा और अपराध के लिए नहीं किया जाता रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी कानून (आईटी कानून), 2000 को इलेक्‍ट्रोनिक लेन-देन को प्रोत्‍साहित करने, ई-कॉमर्स और ई-ट्रांजेक्‍शन के लिए कानूनी मान्‍यता प्रदान करने, ई-शासन को बढ़ावा देने, साइबर अपराधों को रोकने तथा सुरक्षा संबंधी कार्य प्रणाली और प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने के लिए अमल में लाया गया था। यह कानून 17 अक्‍तूबर, 2000 को लागू किया गया।
आईटी कानून के अनुच्‍छेद 79 में कुछ मामलों में मध्‍यवर्ती संस्‍थाओं को देनदारी से छूट के बारे में विस्‍तार से बताया गया है। अनुच्‍छेद 79(2)(सी) में जिक्र किया गया है कि  मध्‍यवर्ती संस्‍थाओं को अपने कर्तव्‍यों का पालन करते हुए उचित तत्‍परता बरतनी चाहिए और साथ ही केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रस्‍तावित अन्‍य दिशा निर्देशों का भी पालन करना चाहिए। तदनुसार सूचना प्रौद्योगिकी (मध्‍यवर्ती संस्‍थानों के लिए दिशा-निर्देश) नियमों, 2011 को अप्रैल-2011 में अधिसूचित किया गया।
आईटी मंत्रालय संशोधन के मसौदे पर 15 जनवरी तक सार्वजनिक टिप्पणियां लेगा और उसके बाद इस पर कोई अंतिम फैसला करेगा।

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