जापान तीन परियोजनाओं के लिए भारत को देगा 105.497 बिलियन येन का ऋण

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Highlights

  • जापान सरकार ने इन तीन परियोजनाओं के लिए कुल 105.497 बिलियन येन - (लगभग 6668.46 करोड़ रुपये) की जेआईसीए आधिकारिक विकास सहायता देने का वायदा किया था।

  • भारत में सतत विकास लक्ष्‍यों के बारे में जापान-भारत सहयोगात्‍मक कार्यों के लिए इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य नीति ढांचे और कार्यान्‍वयन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार के प्रयासों में सहायता प्रदान करके विशेष रूप से सामाजिक विकास में एसटीजी को बढ़ावा देने के लिए योगदान देना है।

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जापान के आधिकारिक विकास सहायता ऋण के संबंध में वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव डॉ. सी.एस.महापात्रा और भारत में जापान के राजदूत महामहिम केंजी हिरमात्‍सु के मध्‍य दस्‍तावेजों का आदान-प्रदान हुआ।
ये ऋण चेन्‍नई मेट्रो परियोजना (फेज-2) और जेपीवाई के लिए 75.519 बिलियन, जेपीवाई के लिए भारत के सतत विकास लक्ष्‍यों के लिए जापान भारत सहयोग कार्यक्रम हेतु 15 बिलियन येन, जेपीवाई के लिए डेयरी विकास परियोजना के लिए 14.978 बिलियन येन की सहायता के रूप में दिये जा रहे हैं।
जापान सरकार ने इन तीन परियोजनाओं के लिए कुल 105.497 बिलियन येन - (लगभग 6668.46 करोड़ रुपये) की जेआईसीए आधिकारिक विकास सहायता देने का वायदा किया था।

प्रमुख तथ्य:

  • भारत में सतत विकास लक्ष्‍यों के बारे में जापान-भारत सहयोगात्‍मक कार्यों के लिए इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य नीति ढांचे और कार्यान्‍वयन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार के प्रयासों में सहायता प्रदान करके विशेष रूप से सामाजिक विकास में एसटीजी को बढ़ावा देने के लिए योगदान देना है।
  • इससे 2030 तक एसटीजी को प्राप्‍त करने में भारत को मदद मिलेगी।
  • डेयरी विकास परियोजना का उद्देश्‍य संगठित बाजार, डेयरी प्रोसेसिंग सुविधाओं को उन्‍नत बनाकर, विपणन बुनियादी ढांचा और उत्‍पादक के स्‍वामित्‍व वाली संस्‍थानों की क्षमता में वृद्धि करके किसानों की पहुंच में बढ़ोतरी द्वारा दूध और डेयरी उत्‍पादों की बिक्री बढ़ाना है।
  • इससे परियोजना के क्षेत्र में दूध उत्‍पादकों की आय बढ़ाने में योगदान मिलेगा।

पृष्ठभूमि:

भारत और जापान का 1958 से ही द्विपक्षीय विकास सहयोग में दीर्घकालिक और लाभदायक इतिहास रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और जापान में आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में बहुत प्रगति हुई है। इससे भारत और जापान में रणनीतिक और वैश्विक भागीदारी को और मजबूत बनाने मे मदद मिलेगी।

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