प्रधानमंत्री मोदी ने बोगीबील सेतु राष्‍ट्र को समर्पित किया

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Highlights

  • बोगीबील सेतु की निर्माण लागत 5920 करोड़ रुपये है। वर्ष 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इस ब्रिज की आधारशिला रखी थी।

  • ये पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है। यह देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है।

  • ब्रह्मपुत्र जलस्तर से 32 मी. ऊंचाई पर बने इस पुल में कुल 42 डबल डी वेल फाउंडेशन खंभों का इस्तेमाल हुआ है।

Bogibeel Bridge

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सुशासन दिवस के दिन असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील सेतु को राष्‍ट्र को समर्पित किया। यह सेतु असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी जिलों के बीच स्थित है। आर्थिक और सामरिक दृष्टि से राष्‍ट्र के लिए इसका अत्‍यधिक महत्‍व है।

ब्रह्मपुत्र नदी के उत्‍तरी  तट पर कारेंग चापोरी में एक जनसभा में प्रधानमंत्री ने इस पुल को पार करने वाली सबसे पहली यात्री रेलगाड़ी को झंडी दिखा कर रवाना किया। मई 2017 में मोदी ने असम के सदिया में देश के सबसे लंबे सड़क पुल - भूपेन हजारिका सेतु को भी राष्ट्र को समर्पित किया था।

बोगीबील सेतु से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  • बोगीबील सेतु की निर्माण लागत 5920 करोड़ रुपये है। यह ब्रिज लड़ाकू विमान और टैंक का भार भी उठा सकता है। वर्ष 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इस ब्रिज की आधारशिला रखी थी। परन्तु इसके निर्माण कार्य का शुभारम्भ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी जी के कार्यकाल में वर्ष 2002 में शुरू हुआ था।
  • ये पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है। यह देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है।
  • इस सेतु रेलवे मार्ग से 705 किमी और सड़क मार्ग से 150 किमी की दूरी को कम करते हुए डिब्रूगढ़ से नाहरलागुन तक सीधा संपर्क स्थापित होगा।
  • ब्रह्मपुत्र जलस्तर से 32 मी. ऊंचाई पर बने इस पुल में कुल 42 डबल डी वेल फाउंडेशन खंभों का इस्तेमाल हुआ है। लोगों के लिए खुल जाने के बाद अब लोगों डिब्रूगढ से धीमाजी जाने के लिए 700 किमी.की दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही ख़तरनाक तरीक़े से नदी को नाव के ज़रिए पार करने से भी मुक्ति मिलेगी।
  • पुल बनने से ईटानगर तक जाने के लिए रेलवे सुविधा को विस्तार मिलेगा।

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