सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की अनिवार्यता की समयसीमा को बढ़ा दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई पूरी होने और फैसला आने तक यह समयसीमा बढ़ाई गई है। जब तक सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आधार को लिंक कराने से जुड़े मामले पर फैसला नहीं देती तब तक आधार को लिंक कराने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई में 5 जजों वाली संवैधानिक पीठ ने यह भी कहा कि सरकार अनिवार्य आधार के लिए जोर नहीं डाल सकती है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला वकील वृंदा ग्रोवर की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जो उन्होंने पासपोर्ट के लिए आधार की अनिवार्यता को लेकर दायर की थी। इनकम टैक्स, पैन कार्ड, मोबाइल, बैंकिंग आदि से आधार को लिंक करने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2018 थी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी 2018 को ही आधार लिंकिंग की तारीख को बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दिया गया था।  

हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आधार स्कीम को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। आधार मामले पर यह बहुचर्चित सुनवाई पिछले पांच सालों से चल रही है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एके सिकरी, और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। 

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