उनका कुबूलनामा

मुंबई हमले में पाकिस्तान की लिप्तता स्वीकार करने के पीछे भले ही नवाज शरीफ का उद्देश्य सेना, न्यायपाल‌िका और आईएसआई पर अपनी भड़ास निकालना हो, पर उनके इस कुबूलनामे के बाद हमें पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाना चाह‌िए।  

भ्रष्टाचार के मामले में सत्ता से बेदखल किए गए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने डॉन अखबार से बातचीत के दौरान यह सच्चाई स्वीकारी है, जो भारत पिछले दस साल से कहता आ रहा है : 26/11  के भीषण आतंकी हमले को पाकिस्तान ने अंजाम दिया था। पाकिस्तान के किसी नेता ने  पहली बार मुंबई हमले में अपनी लिप्तता कुबूल की है। हालांक‌ि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि नवाज शरीफ को मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका पर अफसोस था। नवंबर, 2008 में जब वह हमला हुआ, तब नवाज शरीफ विपक्ष में थे। लेकिन 2013 में जब वह सत्ता में आए, तब मुंबई हमले के गुनाहगारों को सजा दिलाने की कोश‌िश तो दूर, दूसरे नेताओं की तरह उन्होंने उस हमले में पाकिस्तान की भूमिका से इन्कार कर दिया था। जबक‌ि भारत लगातार पाकिस्तान से इस मामले में सहयोग करने की बात कहता रहा है।

नवाज शरीफ ने अब जाकर यह बात मानी है, तो इसके पीछे भी उनकी भलमनसाहत नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य सेना, आईएसआई और न्यायपालिका पर अपनी भड़ास निकाला था। उसमें भी न्याय‌िक व्यवस्था उनके निशाने पर है, जिसने पहले उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया, और अब अगले महीने उन्हें जेल भेजने की चर्चा है। अदालत ने शरीफ के अलावा पूर्व विदेश मंत्री को सत्ता से बेदखल कर दिया है, जबक‌ि भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच वित्त मंत्री देश छोड़कर भाग गए हैं। इसे अगले चुनाव से पहले नवाज शरीफ की पार्टी को ध्वस्त करने की साज‌िश के तौर पर देखा जा रहा है। देश के भीतर सहानुभूत‌ि पाने और दुनिया का ध्यान पाक‌िस्तान की ओर आकृष्ट करने के लिए ही पूर्व प्रधानमंत्री ने ये बातें की हैं।

प्रकारांतर से शायद वह यह भी संदेश देना चाहते हों क‌ि मुंबई हमले में वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते थे, क्योंक‌ि सरकार सेना की कठपुतली है। अलबत्ता नवाज शरीफ का यह कुबूलनामा भारत के लिए बेहद  उपयोगी है। मुंबई हमले के मामले में भारत द्वारा कई डोज‌ियर और पुख्ता प्रमाण देने के बावजूद इस्लामाबाद ने अब तक गुनाहगारों को सजा देने में कोई रुच‌ि नहीं दिखाई, लेकिन अब नवाज शरीफ की स्वीकारोक्ति के आईने में पाकिस्तान पर दबाव डालने का यही माकूल अवसर है। यही नहीं, इस खुलासे के आधार पर हमारी सरकार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जाने के बारे में भी विचार करना चाह‌िए। 
 

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