अमन को एक मौका

रमजान के महीने में सैन्य कार्रवाई पर सशर्त रोक लगाने के सरकार के फैसले से जहां घाटी में माहौल सुधरने की उम्मीद है, वहीं इससे अब तक चुनौत‌ियों से जूझतीं मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की छवि भी बेहतर होगी, जो राज्य के हित में है।

रमजान के पव‌ित्र महीने में सरकार ने कश्मीर में सैन्य कार्रवाई पर सशर्त रोक लगाने का जो फैसला किया है, वह स्वागतयोग्य है। हालांक‌ि पिछले सप्ताह सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के सामने जब यह मांग रखी थी, तब इसका विरोध ही हुआ था। दरअसल घाटी में जिस तरह का हिंसक माहौल है, उसे देखते हुए आतंक‌ियों के ख‌िलाफ सरकार की सख्त नी‌ति की जरूरत से इन्कार नहीं किया जा सकता। सैन्य कार्रवाई स्थग‌ित करने के अपने जोख‌िम तो हैं ही।

सिर्फ यही नहीं कि हाल में पत्थरबाजी से एक सैलानी की मौत हो गई, बल्क‌ि एकतरफा सैन्य कार्रवाई रोकने की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद आतंक‌ियों ने सुरक्षा बलों के काफ‌िले पर हमला बोलकर अपनी मंशा का ही परिचय दिया। इन सबके बावजूद घाटी में अमन बहाली के लिए इस जोख‌िम भरे फैसले का महत्व है। घाटी के स्थानीय लोगों में सरकार के प्रत‌ि असंतोष बढ़ा है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। पिछले साल सरकार ने जिस ऑपरेशन ऑल आउट की शुरुआत की थी, उसमें मारे गए आतंक‌ियों में स्थानीय आतंक‌ियों की संख्या बहुत अध‌िक रही है।

घाटी के युवा और पढ़े-लिखे लोग हताशा में जिस तरह बंदूक थाम रहे हैं; जिसका एक उदाहरण हाल ही में एक प्रोफेसर के आतंकी बनने और सैन्य अभ‌ियान में मारे जाने की घटना से सामने आया है, वह बहुत चिंतनीय है। ऐसे में, रमजान के महीने में यह कदम उठाकर सरकार ने घाटी में अमन को एक मौका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले ही साल लाल किले के प्राचीर से कहा था : 'न गोली से, न गाली से, कश्मीर की समस्या गले लगाने से सुलझेगी।'

इस फैसले से जहां घाटी में हालात सुधरने की उम्मीद है, वहीं इससे अब तक चुनौत‌ियों से जूझ रहीं मुख्यमंत्री महबूबा की छवि भी बेहतर होगी, जो सूबे के हित में है। प्रधानमंत्री के जम्मू-कश्मीर दौरे से ठीक पहले ऐसी एक पहल का लोगों में भी अनुकूल संदेश जाएगा। याद रखना चाह‌िए कि वर्ष 2000 में घाटी में रमजान के दौरान घोष‌ित ऐसा ही संघर्ष विराम पांच महीने तक जारी रहा था। फ‌िर सैन्य कार्रवाई रोकने का ताजा फैसला सशर्त है, यानी लोगों की सुरक्षा के लिए और खुद पर होने वाले हमलों के ख‌िलाफ कार्रवाई करने का अध‌िकार तो सेना और सुरक्षा बलों के पास है ही। 

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