जीएसटी संग्रह के संदर्भ में वस्तुओं का वितरण
 

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डाटा के अनुसार, अप्रैल महीने में 'गुड्स एवं सर्विस टैक्स' (जीएसटी) का संग्रह एक लाख करोड़ के पार पहुंच गया। मार्च महीने में जमा हुई रसीदों के आधार पर यह डाटा जारी किया गया, लेकिन भुगतान अप्रैल में होना था। अगर सटीक आंकड़े की बात करें, तो अप्रैल महीने में नए अप्रत्यक्ष कर से कुल 1,03,458 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। जीएसटी के जुलाई 2017 में लागू होने के बाद से अब तक यह एक महीने में सबसे उच्चतम रिकॉर्ड दर्ज किया गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे 'ऐतिहासिक उपलब्‍धि' और 'आर्थिक गतिविधियों में वृ‌द्ध‌ि का सूचक' करार दिया। पिछले हफ्ते अलग से जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि एक निश्‍चित समय सीमा से जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वाले पंजीकृत करदाताओं की संख्या जुलाई में 57% से बढ़कर मार्च में लगभग 63% हो गई है। और बहुत से लोग ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में लगातार भ्रम की वजह से प्रारंभिक महीनों में समय सीमा के अंदर टैक्‍स भरने में असफल रहे। यहां पर यह ध्यान देने की बात है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में, उन्होंने अपने पिछले बकाया कर को भी जमा किया था। कुल मिलाकर जुलाई 2017 में स्वीकृत पंजीकृत करदाताओं की संख्या अब 96 प्रतिशत से अधिक हो गई है जिन्हें टैक्स फाइल करने की जरूरत है, और लगभग दिसंबर से प्रत्येक महीने 92% से 80% लोग फाइल कर रहे हैं। इसके अलावा, रिटर्न व्यवस्‍था के सरलीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है, जिसकी गति फिलहाल धीमी बनी हुई है। हालांकि यह जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड अर्थव्यवस्था में उछाल के संकेत देता है, सरकार ने निष्पक्ष होकर इस बात पर जोर दिया कि यह संख्या अंतिम छड़ों में लंबित आधिकारिक बकाया राशि को भी शामिल करने की मानवीय प्रवृत्ति से भी प्रेरित हो सकता है । हालांकि यह इस वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना है, फिर भी अनुपाल में देरी होने पर भी 'नए सामान्य' का स्वागत है।

यह भी सच है कि अप्रैल महीने के अंतिम छड़ों के राजस्व को भविष्य के लिए एक स्‍थिर प्रवृत्ति के रूप में नहीं लिया जा सकता है। लेकिन जीएसटी ने शुरुआती महीनों में गड़बड़ी का और उच्च चोरी का जो डर अधिकारियों के मन में बैठाया उसकी वजह से ही, राजस्व संग्रह तीन महीने के 90,000 करोड़ रुपये से अधिक पर आ गया। यह कहना उचित होगा कि नई कर प्रणाली में पहली तीन तिमाहियां मजबूत नोट पर समाप्त हुई। केवल अप्रैल के आधार पर, औसत मासिक संग्रह पहले आठ महीनों में 89,885 करोड़ से बढ़कर 91,300 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार के खुद के आंकलन के आधार पर यह संख्या महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई व्यवस्‍था में एक महीने में लगभग 91,000 करोड़ रुपये देने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहले अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत केंद्र और राज्यों द्वारा खोए गए राजस्व भी इसमें शामिल हैं। पिछले कुछ हफ्तो में ताजा कर विरोधी चोरी के उपायों को पेश किया गया, जिसमें सामानों के आवागमन को ट्रैक करने के लिए ई-वे बिलिंग प्रणाली, कुछ हद तक रोक लगा सकती है। सरकार आपूर्तिकर्ताओं द्वारा व्यवसायों का टैक्स क्रेडिट करने के दावे से मेल करने की भी इच्छुक है। जबकि इन्हें नए वित्तीय वर्ष में जीएसटी राजस्व को बढ़ावा देना चाहिए, खपत और निवेश की मांग में निरंतर पुनरुत्थान की तुलना में कोई भी राजकोषीय तनाव को बेहतर नहीं ठहराएगा। नीति निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कार की बिक्री में वृद्धि हुई है और स्टील और सीमेंट की मांग भी बढ़ी है।

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