हिंदी साहित्य के वरिष्ठ कथाकार, कवि और आलोचक दूधनाथ सिंह का निधन 11 जनवरी, 2018 को हो गया। वे 92 वर्ष के थे। वे प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। दूधनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सोबंथा गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म 17 अक्टूबर 1936 को हुआ था। दूधनाथ सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक रह चुके हैं। 1994 में रिटायरमेंट के बाद से लेखन और संगठन में निरंतर सक्रिय रहे। उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचना सहित सभी विधाओं में लेखन किया। दूधनाथ सिंह की कालजयी रचनाएं में से निम्न है - आखिरी कलाम, लौट आ ओ धार, निराला : आत्महंता आस्था, सपाट चेहरे वाला आदमी, यमगाथा, धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे जैसी कृतियों की रचना की। वहीं, उनके तीन कविता संग्रह भी प्रकाशित हैं।

Hindi literature poet and critic doodhnath Singh pass away

इनके 'एक और भी आदमी है' और 'अगली शताब्दी के नाम' और 'युवा खुशबू' हैं। इसके अलावा उन्होंने एक लंबी कविता- 'सुरंग से लौटते हुए' भी लिखी है। आलोचना में उन्होंने 'निराला: आत्महंता आस्था', 'महादेवी', 'मुक्तिबोध: साहित्य में नई प्रवृत्तियां' जैसी रचनाएं दी हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान भारत-भारती, मध्य प्रदेश सरकार के शिखर सम्मान मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से सम्मानित किया गया था।

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