भारत में IPS अधिकारी का नाम सुनते ही मन में लहर दौड़ पड़ती है और स्वयं को IPS अधिकारी के रूप में देखने की इच्छा होती है। IAS के समान यह बेहद प्रचलित पुलिस सेवा है। वर्ष 1948 को ब्रिटिश कालीन इंडियन (इंपीरियल) पुलिस को भारतीय पुलिस सेवा के रूप में बदल दिया गया था। IPS को आमतौर पर आप जिले में पुलिस के कप्तान या SP, SSP आदि के नाम से जानते होंगे। यह जिले के DM, जोकि एक IAS अधिकारी होता है उनेक लगातार संपर्क और समन्वय में रहते हैं। क्योंकि जिले में कानून व्यवस्था और विभिन्न विभागों के कार्यों में समन्वय का कार्य District Magistrate (DM) को करना होता है। इसप्रकार एक IPS अधिकारी को पुलिस विभाग में सीनियर अधिकारी के अधीन रहते हुए DM को जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना होता है। IPS में चयन कैसे होता है भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कैंडिडेट का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित कराई जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा के माध्यम से होता है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा में पास कैंडिडेट मुख्य देने से पहले मुख्य परीक्षा के फार्म अपनी पसंद के पद का एक क्रम लिखता है। जैसे पहले नबंर IPS दूसरे नबंर पर IAS आदि का। इस परीक्षा का अंतिम परिणाम आने के बाद कैंडिडेट को अन्य शर्तों के साथ उसका पसंदीदा पद दे दिया जाता है यदि वह उतने मार्क्स लाया है, जितने कि उस पद के लिए आवश्यक हैं। IPS कैडर हैदराबाद से ट्रेनिंग लेने के बाद IPS अधिकारियों को उनके संबंधित कैडर में सेवा के लिए भेज दिया जाता है। यह कैडर कैंडिडेट द्वारा मुख्य परीक्षा से पहले चयन किया होता है कैडर उनकी रैंक, IPS पोस्ट का चुनाव और उनकी कैटेगरी में वैकंसी पर निर्भर करता है। एक IPS अधिकारी राज्य सरकार में कार्य करते हुए, जिले (District) की पुलिस का नेतृत्व और उपयोग जिले में शान्ति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था आदि बनाए रखने के लिए करते हैं।   Crack IAS 2018 Exam: विस्तार से जाने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2018 की समयबद्ध, सही दिशा में और सिस्टमेटिक तैयारी
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) संवैधानिक दर्जा और कार्य
 
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