SSC-CGL 2016 Exam Paper Analysis

 

कैसे करें मुख्य परीक्षा की तैयारी ?

संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होने के बाद परीक्षार्थियों के सामने मुख्य परीक्षा के लिए सीमित समय ही बचता है। प्रारंभिक परीक्षा से मुख्य परीक्षा के बीच का यह समय संपूर्ण तैयारी की अवधि का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इन चार-पांच महीनों में प्रत्येक परीक्षार्थी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह वह पाठ्यक्रम में दिए गए विभिन्न टापिकों से संबंधित आधारभूत अवधारणाओं से पूरी तरह परीचित हो चुका है एवं पाठ्यक्रम के अधिकांश भाग पर उसकी पकड़ बन चुकी है। प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद सबसे पहले परीक्षार्थियों को पाठ्यक्रम के उन भागों को चिन्हित कर लेना चाहिए जो परीक्षा की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। (उम्मीदवार चाहें तो पूरे पाठ्यक्रम को प्राथमिकता के आधार पर A, B, C आदि में श्रेणियों में श्रेणीकृत भी कर सकते हैं)। यहां आप पूरे पाठ्यक्रम को अधिकतम तीन श्रेणियों A, B, C में ही वर्गीकृत करें।


श्रेणी 'ए' के तहत पाठ्यक्रम के उन टापिकों को शामिल किया जाना चाहिए जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हों एवं जिन भागों से परीक्षा में प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना हो। गौरतलब है कि प्रत्येक विषय या क्षेत्र के कुछ ऐसे भाग होते हैं जो विषय की आत्मा होते हैं उदाहरण के तौर पर सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-तीन में भारतीय संविधान, गर्वेनेंस से जुड़ी अवधारणाएं एवं तथ्य आदि । इसी प्रकार श्रेणी 'बी' में पाठ्यक्रम के उन टापिकों को रखना चाहिए जो श्रेणी 'ए' में दिए टापिकों से किसी न किसी प्रकार से संबद्ध हों एवं इनमें से परीक्षा में प्रश्न आने की प्रायिकता श्रेणी 'ए' के बाद हो। श्रेणी 'सी' के लिए, यदि वास्तविकता से विश्लेषण किया जाय, तो पूरे पाठ्यक्रम का मुश्किल से 10 प्रतिशत भाग ही शेष बचता है। श्रेणी 'ए' एवं 'बी' के बाद शेष बचा पाठ्यक्रम श्रेणी 'सी' में आ जाएगा

क्या हो रणनीति?

मुख्य परीक्षा में समय की कमी एक व्यवहारिक तथ्य है, जिससे प्रत्येक परीक्षार्थी को जूझना पड़ता है। ऊपर सुझायी गयी तीनों श्रेणियों का मूल उद्देश्य उचित समय प्रबंधन है। उचित समय प्रबंधन के द्वारा एक सामान्य स्तर की तैयारी के साथ इस परीक्षा में अपनी सफलता सुनिश्चित की जा सकती है, जबकि इसके विपरीत समय प्रबंधन के अभाव में अच्छी से अच्छी तैयारी भी असफलता को नहीं रोक सकती।
संक्षेप में, संपूर्ण मुख्य परीक्षा की बेहतर तैयारी ऊपर बतायी गई तीनों श्रेणियों के अर्थपूर्ण क्रियान्वयन में ही निहित है। आइए अब यह जानते हैं कि तीनों श्रेणियों से संबंधित हमारी रणनीति क्या होनी चाहिए ताकि मुख्य परीक्षा में अधिक से अधिक अंक प्राप्त किए जा सकें।

श्रेणी ए से संबंधित रणनीति-

  • मुख्य परीक्षा से लगभग तीन माह पहले इस श्रेणी में निहित टापिकों के नोट्स सिलसिलेवार से तैयार हो जाने चाहिए ताकि इन्हें मुख्य परीक्षा तक कम से कम 40 से 50 बार दोहराया जा सके।
  • इन टापिकों से संबंद्ध करेंट घटनाक्रमों को नियमित रूप से न्यूजपेपर या अन्य प्रामाणिक स्रोतों से लिखते रहना चाहिए।
  • नोट्स इस प्रकार से तैयार होने चाहिए कि उन्हें न्यूनतम उपलब्ध समय में भी सरलता से देखा या दोहराया जा सके। इसमें परीक्षार्थी बिन्दुवार नोट्स, चित्र आदि की सहायता भी ले सकते हैं।
  • पूरी तैयारी की समयावधि का लगभग 60 प्रतिशत भाग इस श्रेणी में चिन्हित टापिकों पर केंद्रित करना चाहिए।

श्रेणी बी से संबंधित रणनीति-

  • समय की सीमितता के कारण सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के नोट्स सिलेसिलेवार ढंग से नहीं बनाए जा सकते, इसे देखते इस श्रेणी के टापिकों को इस अवधि में समय-समय पर पुस्तकों या अन्य बाहरी स्रोतों (जो पहले से निश्चित किए जा चुकें हों) से दोहराते रहना चाहिए।
  • इन टापिकों से संबंधित अवधारणाओं को, आप रिक्त समय जैसे सोने से पहले, खाना खाते समय या अपनी सुविधानुसार अन्य किसी समय, मन में याद कर सकते हैं या उन पर मनन कर सकते हैं।
  • संक्षेप में आप यह जान लें कि परीक्षा आने तक आपकी स्थिति ऐसी हो जानी चाहिए कि आप इस श्रेणी से संबंद्ध किसी भी टापिक पर, पूर्ण तथ्यों के अभाव में भी 100 से 200 शब्दों का एक अर्थपूर्ण उत्तर लिख सकें।
  • सम्पूर्ण अवधि का 30 से 35 प्रतिशत भाग इस श्रेणी की तैयारी पर दिया जाना चाहिए।

श्रेणी सी से संबंधित रणनीति-

  • इस श्रेणी में चिन्हित टापिकों के लिए परीक्षार्थियों को तुलनात्मक रूप से थोड़ा निश्चिंत होना चाहिए। अगर परीक्षार्थी इस श्रेणी के टापिकों को अंतिम रूप से दोहरा भी न पायें तो उन्हें इसे लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
  • इसके अंतर्गत आने वाले टापिकों को तैयार करने के प्रमुख स्रोत पत्र-पत्रिकाएं, समाचार पत्र, जर्नल इत्यादि होते हैं। इनके माध्यम से तैयारी की लंबी अवधि के दौरान अवधारणाओं को निर्माण किया जाता है।
  • इस श्रेणी के टापिकों का रिवीजन अंतिम चार से पांच माह के दौरान 4 से 5 बार ही करने की आवश्यकता होती है।