Editorials Of Leading Newspapers

'द हिंदू' संपादकीय (एडिटोरियल)

एक निष्पक्ष इंटरनेट बिना भेदभाव के सभी को इंटरनेट सुलभ कराने के लिए जारी संघर्ष के लिए 28 नवंबर, 2017 को आया फैसला स्वागत योग्य है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) अंततः नेट निष्पक्षता के पक्ष में स्पष्ट दिशानिर्देशों के साथ सामने आया जो कि फेसबुक के मुक्त आधारभूत प्रस्ताव के शुरुआती कदम के ढर्रे पर है। मई 2016 और इस वर्ष के जनवरी में परामर्श पत्र जारी होने के बाद प्राधिकरण ने इस बात को दोहराया कि सेवा प्रदाताओं के द्वारा इंटरनेट पर वेबसाइटों के लिए भेदभावपूर्ण तरीका नहीं अपनाया जा सकता है। विशेषकर ट्राई ने प्रदाताओं को कुछ वेबसाइटों ...

  • Jan
  • 30
  • 2017

'दि इंडियन एक्सप्रेस' संपादकीय (एडिटोरियल)

01 नवम्बर 2017 संयम है जरूरी जब तक संवैधानिक बेंच का फैसला नहीं आता, तब तक सरकार को आधार स्कीम को लेकर अपनी उत्सुकता पर संयम रखना होगा। पिछले सप्ताह, उच्चतम न्यायालय ने सरकार से सवाल किया कि क्या वह नागरिकों को उनके मोबाइल और बैंक खाते, आधार से जोड़ने के लिए दबाव दे रही है? इस सीधे से सवाल का अटॉर्नी जनरल द्वारा दिया गया जबाव संतोषजनक नहीं था। "इसमें कोई ज़बरदस्ती नहीं होगी", के.के.वेणुगोपाल ने अदालत को बताया। परंतु उन्होनें कोई भी ऐसा लिखित दस्तावेज देने से मना कर दिया जो ऐसे लोगों के खिलाफ दंड का प्रावधान बनाऐ, जो ...

  • Jan
  • 15
  • 2017

'दि इंडियन एक्सप्रेस' संपादकीय (एडिटोरियल)

16 नवम्बर 2017 तय मानकों पर हो पर्यावरण की समीक्षा ग्रीन कोर्ट के हस्तक्षेप ऑड-इवन ‌के जरिये वर्तमान प्रदूषण आपात को नियंत्रित करने को लेकर इस नीति को लागू करने की संभावना पर विराम चिन्ह लगा दिया है। पिछले हफ्ते नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई, जब दिल्ली सरकार ने सड़कों पर अजीबो-गरीब तरीके से ऑड-इवन लागू करने का फैसला किया। ट्रिब्यूनल ने दबाव बनाया कि केवल कानून के जरिये ही नहीं, जो कि करना अनिवार्य है, बल्कि नीति पर होना जरूरी है, इसलिए सबसे अच्छा तरीका कार्यपालिका पर छोड़ देना है। यह पाया गया कि दिल्ली सरकार की योजना ...

  • Jan
  • 15
  • 2017

'दि इंडियन एक्सप्रेस' संपादकीय (एडिटोरियल) 27 अक्टूबर, 2017

Editorials of leading newspapers is provided in Hindi to help students prepare for competitive exams. बनें खुद के सम्पादक युवाओं को फेक न्यूज की पहचान करना सीखना होगा। उन्हे सूचना के और बेहतर स्रोतों की तलाश करनी होगी। प्राचीन रोम से विक्टोरियन काल तक, एक तार्किक और वक्रपटुता का अभ्यास युवाओं को झूठे और संदेहास्पद तथ्यों की पहचान कराने के लिए किया कराया जाता रहा है। समय बदला परन्तु इटली इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि उनके युवा, अपने पूर्वजों की तरह ही, 2017 के इस नये फोरम के लिए तैयार हो जाएं, जो कि है सोशल मीडिया। अक्टूबर के अंत ...

  • Jan
  • 27
  • 2017

'दि इंडियन एक्सप्रेस' संपादकीय (एडिटोरियल) 07 सितम्बर, 2017

Editorials of leading newspapers is provided in Hindi to help students prepare for competitive exams. शरणार्थी, तुम्हारा स्वागत है रोहिंग्या मसले पर भारत सताए हुओं के प्रति अपनी करूणा और आतिथ्य की वृत्ति के अनुपालन में नाकाम हो रहा है वॉर् श्काफ्न दास यानी कि हम यह कर सकते हैं। इन तीन शब्दों के साथ जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने 2015 में अपने देश का दरवाजा सीरियाई शरणार्थियों के लिए उस समय खोला दिया था, जब कोई भी देश उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा था। इससे विश्व पटल पर नाटकीय रूप से जर्मनी की प्रतिष्ठा और रूतबे में बढ़ोतरी हुई। यह दुखद ...

  • Jan
  • 20
  • 2017

'दि इंडियन एक्सप्रेस' एडिटोरियल 30 अगस्त, 2017

Editorials of leading newspapers is provided in Hindi to help students prepare for competitive exams. व्यवसाय करने की असहजता नीति आयोग के सर्वेक्षण से लगता है कि व्यवसाय शुरू करना अभी भी मुश्किल काम ही है। आखिर ऐसा क्यों है, सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। पिछले साल विश्व बैंक की ईजी ऑफ डुईंग बिजनेस (व्यवसाय करने की सहजता) रैंकिंग में भारत का 150 देशों में से 130वें स्थान पर आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौकरशाहों से देश के इस निराशाजनक प्रदर्शन की वजहों को बताने के लिए कहा और रैंकिंग में सुधार करने के लिए उन्हें निर्देश दिए। लगभग 10 ...

  • Jan
  • 30
  • 2017