UP PGT (Post Graduate Teachers)


परास्नातक अध्यापक

  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परीक्षा का आयोजन किया जाता है
  • यूपी 1982 के अधिनियम संख्या 5 के रूप में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक अधिनियम द्वारा पारित इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम ,1921 के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिक्षकों के चयन के लिए माध्यमिक शिक्षा ( सेवा चयन बोर्ड ) अधिनियम ,1982 की स्थापना के लिए यह परीक्षा राज्य स्तर पर आयोजित की जाती है.
  • मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह परीक्षा लोकप्रिय है.
  • टीजीटी के लिए ग्रेजुएट और बीएड होना जरूरी है तो पीजीटी के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड डिग्री आवश्यक है.
  • टीजीटी पास शिक्षक 6वीं क्लास से लेकर 10वीं तक के बच्चों को पढ़ाते हैं तो पीजीटी के शिक्षक सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं.

 

 

UPSESSB-logo

  • माध्यमिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 और उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा नियंत्रित किया गया था।
  • यह महसूस किया गया कि उक्त अधिनियम के प्रावधानों और नियमों के तहत शिक्षकों के चयन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष कुछ समय नहीं था।
  • इसके अलावा, चयन के क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा प्रतिबंधित किया गया था।
  • इस पर प्रतिकूल उपयुक्त शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा के स्तर को प्रभावित किया।
  • यह इसलिए, राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग का गठन करने, प्रधानाध्यापकों, व्याख्याताओं, हेड-स्वामी और L.T. चयन करने के लिए आवश्यक माना जाता था
  • ग्रेड शिक्षकों और क्षेत्रीय स्तर पर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्डों का चयन करें और C.T./J.T.C./B.T.C में अपेक्षाकृत कम पदों के लिए उपलब्ध उपयुक्त उम्मीदवार बनाने के लिए।
  • ऐसे संस्थानों के लिए ग्रेड।
  • बोर्ड के एक निगमित निकाय किया जाएगा। यह उत्तर प्रदेश भर की शक्तियों का प्रयोग करेगा और इसका मुख्यालय इलाहाबाद में किया जाएगा।
  • माध्यमिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 और उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा नियंत्रित किया गया था।
  • यह महसूस किया गया कि उक्त अधिनियम के प्रावधानों और नियमों के तहत शिक्षकों के चयन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष कुछ समय नहीं था।
  • इसके अलावा, चयन के क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा प्रतिबंधित किया गया था।
  • इस पर प्रतिकूल उपयुक्त शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा के स्तर को प्रभावित किया।
  • यह इसलिए, राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग का गठन करने, प्रधानाध्यापकों, व्याख्याताओं, हेड-स्वामी और L.T. चयन करने के लिए आवश्यक माना जाता था
  • ग्रेड शिक्षकों और क्षेत्रीय स्तर पर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्डों का चयन करें और C.T./J.T.C./B.T.C में अपेक्षाकृत कम पदों के लिए उपलब्ध उपयुक्त उम्मीदवार बनाने के लिए। ऐसे संस्थानों के लिए ग्रेड।
  • बोर्ड के एक निगमित निकाय किया जाएगा। यह उत्तर प्रदेश भर शक्तियों का प्रयोग करेगा और इसका मुख्यालय इलाहाबाद में किया जाएगा। 

  • परास्नातक अध्यापक (पीजीटी) रु0 9,300 - रुपये। 34,800- रुपये। (बेसिक ) से अधिक रुपये । 4800 ग्रेड पे ।

  • इस रोजगार पद पर आवेदन करने के लिए शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था से किसी भी विषय में परास्नातक की डीग्री  होनी चाहिए।

 

 

एग्जाम पैटर्न


उत्तर प्रदेश पीजीटी की परीक्षा दो चरणों में संपन्न होती है :

  • लिखित परीक्षा (Written exam) 85%
  • साक्षात्कार (Interview)10%

  • अंग्रेजी और हिंदी से संबंधित प्रश्न

  • सामान्य ज्ञान और प्रासंगिक विषयों से संबंधित पूछे जाते है
क्र. सं.
विषय विषय
1.भौतिक विज्ञान 10.इतिहास
2.अंग्रेजी11.नागरिक शास्त्र
3.हिंदी12. अर्थशास्त्र
4.संस्कृत13. शिक्षा
 5.जूलॉजी14. मनोविज्ञान
 6.गणित15. कृषि
 7.सैन्य विज्ञान16. भूविज्ञान
8. तर्क17. समाजशास्त्र
 9.गृह विज्ञान और पाली18. संगीत

 

  • प्रत्येक विषय के अभ्यर्थियों के लिए अलग अलग परीक्षा का आयोजन किया जाता है।
  • इस परीक्षा में कुल 125 बहुविकल्पीय प्रश्न (multiple choice questions) होते हैं।
  • प्रत्येक प्रश्न के 4 विकल्प होते हैं। लिखित परीक्षा दोनों टीजीटी व पीजीटी के लिए 2 भाग में विभाजित की जाती है।
  • अंग्रेजी और हिंदी भाषा और सामान्य ज्ञान, हिंदी और उम्मीदवारों द्वारा चयनित वह अन्य विषय भाग द्वितीय में किया जाता है।
  • परीक्षा पेपर कुल 200 वस्तुनिष्ठ प्रश्न और प्रत्येक प्रश्न करने का समय 3 घंटे होता है।

जॉब अलर्ट और समाचार

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एग्जाम में सफल होने के लिए रणनीति, सुझाव और तरकीब

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पाठ्यक्रम

हिन्दी साहित्य का इतिहासः आदिकालीन साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियां, भक्तिकाल,सन्तकाव्य, सूफीकाव्य, रामभक्ति काव्य, कृष्ण भक्ति काव्य, रीतिकाव्य धारा, रीतिबद्ध, रीतिमुक्त, रीतिसिद्ध, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, नयी कविता।

गद्य साहित्य का विकास- निबन्ध, नाटक, कहानी, उपन्यास, आलोचना। हिन्दी की लघु विधाओं का विकासात्मक परिचय, जीवनी, संस्मरण, आत्मकथा, रेखाचित्र, यात्रा-साहित्य, गद्यकाव्य एवं व्यंग्य।

काव्य शास्त्र- अवयव, भेदं , रस, छन्द, अलंकार, काव्यगुण, काव्यदोष, शब्द शक्तियाँ। भाषा विज्ञान- हिन्दी की उप भाषाएं, विभाषाएं, बोलियां, हिन्दी शब्द सम्पदा, हिन्दी की ध्वनियां।

व्याकरण- हिन्दी की वर्तनी, सन्धि, समास, लिंग, वचन, कारक, विराम चिन्हों का प्रयोग, पर्यायवाची, विलोम, वाक्यांश के लिए एक शब्द, वाक्य शुद्धि, मुहावरा लोकोक्ति।
संस्कृत-साहित्य: (क) संस्कृत साहित्य के प्रमुख रचनाकार एवं उनकी रचनाएं,भास, कालीदास, भारवी, माघ, दण्डी, भवभूति, श्री हर्ष, मम्मट, विश्वनाथ, राजशेखर।
(ख) व्याकरण- सन्धि, स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग समास, विभक्ति, उपसर्ग, प्रत्यय,शब्दरूप, धातुरूप, काल अनुवाद।

साहित्य परिचय (गद्य, पद्य एवं नाटक)निम्न ग्रन्थों के निर्धारित अंको के आधार पर शब्दार्थ, सूक्तियों के भावार्थ, शब्द का व्याकरणात्मक टिप्पणी, चरित्र चित्रण, तथा ग्रन्थकर्ता के परिचय। कादम्बरी, (कथामुखम), नलचम्पू (प्रथम उच्छ्वास), शिशुपाल बधम् (प्रथम सर्ग), अभिज्ञान शाकुन्तलम और मृच्छकटिकम, गद्यकाव्य, खण्डकाव्य, महाकाव्य एवं नाट्यकाव्य के उद्भव और विकास का सामान्यस परिचय।संस्कृत वाङमय में प्रति‌बिम्बित भारतीय दर्शन इस खण्ड में श्रीमद्भागवद्गीता, तर्कभाषा, सांख्यकारिका तथा वेदान्तसार के अनुसार प्रमुख दार्शनिक सिद्धान्तों का सामान्य परिचय काव्यशास्त्र (साहित्य दर्पण एवं काव्य प्रकाश के अनुसार), काव्य लक्षण, प्रयोजन, शब्दवृत्तियां, ध्वनि, रस एवं निम्नलिखित अलंकारों का परिज्ञान-अनुप्रास, यमक श्लेष, उपमा, रूपक, उत्पे्रक्षा, सन्देह, भ्रान्तिमान्, अतिशयोक्ति, स्वभोक्ति विरोभास तथा पारिसंख्या।

उर्दू अदब की तारीखः उर्दू का इब्तिदा और इर्तिका (मुखतलिफ नजरियात), दकनी उर्दू (असनाफ नजम-ओ-नस्त्र), शुमासी हिन्द से अदब का इर्तिका (नजम-ओ-नस्त्र), उर्दू नस्त्र का इर्तिका, उर्दू शाइरी का इर्तिका, असनाफे नस्त्र (तारीफ और इर्तिका), दास्तान, नावेल, अफसाना, ड्रामा, तंज-ओ-मिजाह, खतून, गजामीन, सवानेह, निगारी।
असनाफ नजम (तारीफ और इर्तिका) - गजल, कसीदा, मसनवी, नज्म, मार्सिया, रूबाई, मशहूर, सनअतें, अदबी मालूमात, (मशहूर मुसन्निफीन की किताबों के नाम, मशहूर किताबों के मुसन्निफीन के नाम), मशहूर हदबी इनआमत और हरसाल इनआमात पाने वाले शहरों और अदीबों के नाम, उर्दू के रसाइल और अखबारात और उनके एडिटरों के नाम। उर्दू अकाडिमयां - उर्दू के मशहुर शाइर और अदीबों की तारीख-ए-पैदाइश और तारीख-ए-वफात्, उर्दू लाईब्रेरियों के नाम एवं गलत शेरों और गलत जुमलों की इस्लाह।

राजनीति सिद्धान्त- राजनीतिकशास्त्र- परिभाषा, विषय क्षेत्र एवं अध्ययन पद्धतियां, राज्य-परिभाषा, तत्व राज्य की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त, राजनीतिक अवधारणाएं, सम्प्रभुता- अर्थ, प्रमुख विशेषताएं, सम्प्रभुता के प्रकार, एकलवादी एवं बहुलवादी सिद्धानत, कानून-परिभाषा, कानून के स्रोत, कानून और नैतिकता, स्वतंत्रता, समानता, अधिकार, न्याय, राजनीतिकवाद-व्यक्तिवाद, उदारवाद, प्रत्ययवाद, अराजकतावाद, फॉसीवाद, वैज्ञानिक समाजवाद प्रजातंत्र एवं अधिनायकतंत्र। राजनीतिक दर्शन- प्लटों, अरस्तू, हाब्स, लाक, मान्टूस्क्यू, रूसो, जे0एस0 मिल, कार्लमाक्र्स, लेनिन, माओत्सेतुंग, मनु, कौटिल्य, गांधी, नेहरू, डॉ0 अम्बेडकर, लोहिया और जय प्रकाश नारायण के राजनीतिक दर्शन।तुलनात्मक राजनीति- संघवाद- प्रमुख तत्व, प्रवृत्तियां एवं समस्याएं, नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य,व्यवस्थापिक-संरचनाकार्य,कार्यपालिका-संरचना, अधिकार एवं स्थिति, न्यायपालिका- संरचना कार्य एवं स्वतंत्रता, नौकरशाही-कार्य, महत्व, प्रतिबद्धता एवं तटस्थता, निर्वाचन पद्धति-समस्याएं एवं समाधान। राजनीतिक दल-दल दबाव समूल तथा लोकमत उपर्युक्त अवधारणाओं का अध्ययन भारत, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस एवं चीन के विशेष सन्दर्भ में।

 

विश्व की प्रागैतिहासिक चित्रकला के प्रमुख केन्द्र जैसे-अल्टीमीराम (स्पेन), लासकाम्स (कागुल), भोपालन क्षेत्र (भीम बेडका), मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), होशंगाबाद (म0प्र0), भित्ति चित्रण की परम्पराएं- फ्रेस्को सैको, अजन्ता फ्रेस्को, जयपुर फ्रेस्कों, गोर्धिक चित्रकला का इतिहास, भारतीय लघु चित्रकारी और इसकी प्रमुख उपशैलियां जैसे कोटा बूंदी, मेवाड़ अलवर किशनगढ़। मुगल-अकबर, जहांगीर, शाहजहां पहाड़-कांगड़ा, बसौली आदि, कम्पनी स्कूल (पटना कलम), बाइजेनटाइन चित्रकला एवं स्टेनग्लास, पुनरूथान एवं चरम पुनरूत्थान कालीन योरोपीय चित्रकला, नवशास्त्रीय कला एवं स्वच्छंदवादी चित्रकला, प्रभाववाद, उत्तर प्रभाववाद, धनवाद, अभिव्यंजनावाद, अतियथार्थवाद एवं उनके प्रसिद्ध कला एवं चित्रकार, समकालीन चित्रकला (धाराएं एवं प्रसिद्ध चित्रकार), पूर्व पश्चिम की सौन्दर्य शास्त्र की तुलनात्मक व्याख्या, रस और सौन्दर्य बोध का कला में स्थान।

समाज शास्त्र का अर्थ विषयवस्तु, क्षेत्र, समाजशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास, समाज शास्त्र का अन्य समाज विज्ञानों के साथ सम्बन्ध, - समाजशासत्र के पाश्चात्य विचारक, आगस्त कांट, हरर्बट स्पेन्सर, इमाइल दुर्खीम एवं मैक्स वेबर, भारतीय विचारक- श्री अरविन्दों, गांधी, राधाकमल मुकर्जी, भगवानदास, समाजशास्त्रीय सिद्धान्तों की अद्यतन प्रवृत्तियों अन्तः प्रवृत्तियां प्रकार्यवाद, संघर्ष का सिद्धान्त, सामाजिक विनमय का सिद्धान्त, प्रतीकात्मक अन्तः क्रियावाद, प्रघटनाशास्त्र, प्रमुख सामाजिक संस्थाएं- परिवार, विवाह, धर्म प्रमुख सामाजिक प्रक्रियाएं: सहायोग, संघर्ष, प्राथमिक अवधारणाएं-सामाजिक समूह, समिति, संस्था, समुदाय सामाजिक स्तरीकरीण, भौगोलिक पर्यावरण एवं मानव समाज-संस्कृति एवं व्यक्तित्व, समाजीकरण, सामजिक नियंत्रण, सामजिक परिवर्तन हिन्दू समाजिक संगठन-वर्णाश्रम, धर्म, पुरूषार्थ, संस्कार, कर्म का सिद्धान्त, हिन्दू विवाह एवं संयुक्त परिवार, मुसलमानों में विवाह एवं परिवार, जाति व्यवस्था, जजमानी व्यवस्था, नातेदार संगठन, अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछडे़ वर्ग से सम्बन्धत समस्याएं, भारतीय स्त्रियां एवं उनसे सम्बन्धित समस्याएं।

 

शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप (औपचारिक/अनौपचारिक/औपचारिकेतर) एवं विषय क्षेत्र, शिक्षा का उद्देश्य एवं शिक्षा के अभिकरण, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा का उत्तर प्रदेश में स्वरूप एवं संगठन, महात्मा गांधी, टैगोर, अरविन्द, मालवीय, विवेकानन्द के शैक्षिक विचार, शिक्षा में नवाचार-जीवन पर्यन्त शिक्षा, सतत् शिक्षा, जनसंचार साधन और शिक्षा दूरशिक्षा एवं खुला विद्यालय, भारतीय शिक्षा का इतिहास एवं समस्यायें-वैदिक कालीन, बौद्धकालीन, मध्ययुगीन, ब्रिटिश कालीन एवं स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय शिक्षा की विशेषताएं उनका आधुनिक शिक्षा पर प्रभाव, स्वतंत्र भारत में शिक्षा का संवैधानिक स्वरूप एवं विभिन्न आयोगों की संस्तुतियां एवं मूल्यांकन, भारत में प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के परिपे्रक्ष्य में नियन्त्रण, मूल्यांकन, एवं सम्बन्धित समस्याओं की विवेचना, शिक्षा की ज्वलन्त समस्याएं-राष्ट्रीय एकता एवं शिक्षा, शिक्षित बेरोजगारी, भाषा-विवाद, छात्र-अशान्ति, नैतिक शिक्षा, शिक्षा का गिरता स्तर एवं बालिकाओं शिक्षा।
शिक्षा का दर्शन एवं समाजशास्त्र- शिक्षा एवं दर्शन का सम्बन्ध, शिक्षा-दर्शन का स्वरूप एवं महत्व शिक्षा-दर्शन की विभिन्न संस्थाएं-आदर्शवाद, प्रकृतिवाद, प्रयोजनवाद, यथार्थवाद के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य पाठ्यक्रम विधियां एवं अनुशासन, शैक्षिक समाजशास्त्र-अर्थ एवं विषय क्षेत्र, संसकृति एवं शिक्षा का नगरीकरण एवं आधुनिकीकरण, सामाजिक स्तरीकरण एवं शिक्षा सामाजिक परिवर्तन एवं शिक्षा, सम्प्रदाय एवं शिक्षा, धर्म एवं शिक्षा।
शिक्षा मनोविज्ञान- अर्थ क्षेत्र एवं महत्व, विकास एवं अभिवृद्धि, बालक की शैशवावस्था में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास एवं शिक्षा में उनका महत्व, व्यक्तित्व एवं वैयक्तिक भिन्नताएं व्यक्तित्व का मापन, शिक्षा में इनका महत्व सीखना- नियम एवं विभिन्न सिद्धान्त, थार्नडाइव, पैवलव, कोहलर, कोफता, रिकनपर एवं हब के सीखने के सिद्धान्तों की विवेचना एवं शैक्षिक निहितार्थ, अभिप्रेरणा एवं सीखने का स्थानान्तरण, वृद्धि-स्वरूप, सिद्धान्त एवं बुद्धिमापन, मानसिक स्वास्थ्य एवं शिक्षा में इसका महत्व, चिन्तन, तर्क समस्या समाधान, सृजनात्मकता, स्मृति-विस्मृति, प्रत्यय निर्माण का अर्थ एवं शैक्षिक निहितार्थ।

अर्थ, परिभाषा, विषयक्षेत्र, उपयोगिता, मनोविज्ञान की अध्ययन विधियां, प्रायोगिक अध्ययन विधियां, निरीक्षण, सैद्धान्तिक अधिकल्प, - अर्थ एवं महत्व, अभिप्रेरणा को प्रभावित करने वाले कारक, अभिप्रेत व्यवहार के प्रतिमान सामाजिक अभिप्रेरक, सवेग- सामान्य एवं जटिल संवेगात्मक अवस्थायें, संवेग एवं शारीरिक परिवर्तन, संवेग की सैद्धान्तिक विवेचना, संवेग के सिद्धान्त संज्ञानात्मक कारक एवं संवेग, प्रत्यक्षीकरण एवं अवधान-प्रत्यक्षीकरण का स्वरूप, गेस्टाल्टवाद की मान्यताएं, प्रात्यक्षिक संगठन के नियम, प्रेम अवधान का स्वरूप एवं विशेषताएं, चयनात्मक अवधान के निर्धरक, स्मृति-स्मृति के मूल प्रक्रम, स्मृति का मापन, विस्मरण को प्रभावित करने वाले कारक, स्मृति के प्रकार, अधिगम (सीखना) अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक (आयु एवं परिपक्वता, अनुबन्धन-प्राचीन एवं नैमित्तिक प्रयत्न एवं भूल द्वारा सीखना), अन्तर्दृष्टि अधिगम आदत का निर्माण एवं आदत को प्रभावित करने वाले कारक, व्यक्तित्व - (व्यक्तित्व का स्वरूप), व्यक्तित्व के निर्धारक-वंशानुक्रम, वातारण एवं संस्कृति, व्यक्तित्व विकास की अवस्थाएं, मनोविज्ञानिक परीक्षण-शाब्दिक एवं निष्पादन वृद्धि परीक्षण, सामूहिक एवं व्यक्तिगत परीक्षण, परीक्षण की सावधानियां, निर्देशन-भारतीय परिवेश के अनुकूल शैक्षिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत निर्देशन, उत्तर पदेश में निर्देशन सेवा की दशा सुधार के उपाय, असामान्य व्यवहार एवं मानसिक स्वास्थ्य-मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ,

 

पुरा ऐतिहासिक संस्कृतियां- पूर्व पाषाण युग, मध्य पाषाण युग, नव पाषाण युग और इनकी प्रमुख विशेषताएं। सिन्धु घाटी की सभ्यता- नगर नियोजन, धार्मिक जीवन और सामाजिक जीवन। वैदिक काल- पूर्व वैदिक काल एवं उत्तर वैदिक काल-सामाजिक दशा, धार्मिक दशा, आर्थिक दशा और राजनीतिक दशा। धार्मिक आन्दोलन-जैन धर्म, बौद्ध धर्म, भागवत धर्म, शैव धर्म, हिन्दू धर्म, के पुनर्गठन में शंकराचार्य का योगदान।मौर्य साम्राज्य- राजनीतिक इतिहास, अशोक का मूल्यांकन, समाज एवं संस्कृतिक। गुप्त राजवंश-राजनीतिक इतिहास, कला, धर्म, दर्शन एवं समाज, गुप्तोत्तर काल में आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन। चोल वंश-राजनीतिक इतिहास, चोल प्रशासन, उत्तर भारत की राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिति (800 ई0 से 1200 ई0 तक)।तुर्क आक्रमण - महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी दिल्ली सल्तनत की स्थापना- कुतुबुद्दीन एबक की उपलब्धियों का मूल्यांकन, इल्तुतमिश का सल्तनत शासकों में स्थान, रजिया सुल्तान का मध्यकालीन भारतीय इतिहास में महत्व। बलबन की प्रारम्भिक कठिनाइयाँ-बलबन का राजस्व सिद्धान्त, खिलजी- क्रांति एवं उसका महत्व, अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य विस्तार, बाजार मूल्य नियंत्रण नीति, भू-राजस्व सुधार, दक्षिण नीति। तुगलक वंश- गयासुद्दीन तुगलक - जीवन चरित्र एवं उपलब्धियां, मुहम्मद बिन तुगलक, विभिन्न योजनाएं, मुहम्मद बिन तुगलक का समीक्षात्मक मूल्यांकन, फिरोजशाह तुगलक, तैमूर आक्रमण एवं उसका प्रभाव बहमैनी राजवंश, विजय नगर, सैयद एवं लोदी वंश, मुगल वंश बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां, एवं औंरगजेब की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दशा। मुगल साम्राज्य का पतन-मराठा अभ्युदय-छत्रपति शिवाजी का जीवन चरित्र एवं उपलब्धियां।आधुनिक कालीन भारतीय इतिहास- भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का अगमन-भारत में ब्रिटिश शासन के राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभाव, सन् 1857 के विद्रोह के कारण, स्वरूप एवं परिणाम, उन्नीसवीं शताब्दी में पुनर्जागरण तथा सामाजिक - आर्थिक आन्दोलन, स्वामी दयानन्द सरस्वती, राजा राममोहन राय, अरविन्द घोष, एनी बेसेण्ट एवं रवीन्द्र नाथ टैगोर, राष्ट्रीय आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान, स्वतंत्रता की प्राप्ति, देश का विभाजन और उसके बाद का भारत-सन 2000 तक।

उच्च आर्थिक सिद्धान्त- साम्य का विचार एवं प्रकार मांग का सिद्धान्त, मांग के लोच की माप, आंडी या प्रतिलोच, उपभोक्ता का अतिरेक, तटस्थ, वक्र तकनीक, उपभोक्ता साम्य, उद्घाटित अधिमान सिद्धान्त, उत्पत्ति के नियम एवं पैमाने के प्रतिफल नियम, उत्पादन फलन - अल्पकालीन एवं दीर्घ कालीन एवं काब-डगलस उत्पादन फलन जनसंख्या संक्रमण, जनसंख्या संक्रमण सि़द्धान्त।अर्थ का सिद्धान्त- पूर्ण प्रतियोगिता, एकाधिकार, द्वाधिकार, अल्पाधिकार एवं एकाधिकृत प्रतियोगिता तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था में कीमत निर्धारण। ।लोक वित्त - लोकवित्त के सिद्धान्त, निजी एवं सार्वजनिक वस्तुएं सार्वजनिक व्यय- उद्देश्य, सिद्धान्त एवं आर्थिक प्रभाव, संतुलित एवं असंतुलित बजट, राजकोषीय, वित्त, क्रियात्मक वित्त एवं युद्ध वित्त, विकासशील अर्थव्यवस्था में राजकोषीय नीति। सार्वजनिक आय- करारोपण के सिद्धान्त, करों का वर्गीकरण, करों में समानता, कराभार एवं कर विवर्तन, कर भार के सिद्धान्त, पूंजीकृत कर विवर्तन, दोहराकर एवं कर देय क्षमता।सार्वजनिक ऋण- ऋण भार, कर बनाम। 
अन्तर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र- अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धान्त (एडमस्मिथ, रिकार्डों और मिल) पारस्परिक मांग सिद्धान्त, मार्शल का अन्तर्राष्ट्रीय मूल्य का सिद्धान्त, अवसर लागत सिद्धान्त, (हैबरलर) समान्य संतुलन सिद्धान्त (हेक्श्चर-ओहलिन), लियोन्तीफ विरोधाभास।
विदेशी विनिमय दर- क्रय शक्ति समता एवं भुगतान संतुलन सिद्धान्त, व्यापार की शर्त, स्वतंत्र व्यापार बनाम संरक्षण, प्रशुल्क, राशिपतन, द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार।
आर्थिक विकास एवं भारतीय अर्थव्यवस्था- आर्थिक विकास की समस्याएं, विकास की अवस्थाएं, विकास माडल-प्रतिष्ठित, हैरोड एवं डोमर माडल। भारत में जनवृद्धि एवं संरचना, जनसंख्या नीति, राष्ट्रीय आय की नवीन अवधारणाएं, राष्ट्रीय आय की प्रवृत्तियां गरीबी एवं अल्परोजगार की समस्याएं, रोजगार नीति, ऊर्जा संकट, कृषि वित्त की समस्याएं एवं उपाय, अन्नपूर्णा योजना, भारत की नई औद्योगिक नीति एवं उपक्रम, लघु एवं कुटीर औद्योगिक नीति, निर्यात संवर्द्धन, सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण, बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एवं भारतीय आर्थिक विकास।

 

शरीर संरचना विज्ञान-शरीर संरचना विज्ञान का परिचय एवं कोशिका की संरचना एवं संगठन जीव द्रव्य की विशेषता, तन्तु का विकास इतिहास और शरीर में उनका वितरण, खून एवं पंछा (लिम्फ), दिल और संरचण, रक्त का जमना, रक्त निर्माण एवं विघटन, नशें और धमनी दबाव, श्वसन तंत्र की संरचना, श्वसन की कार्य प्रणाली, फेफड़ा और तंतुओं में गैंसों का आदान-प्रदान, अम्ल आधारित संतुलन, श्वसन तंत्र का शिरा एवं रासायनिक नियंत्रण अनोक्सिया, असफिक्सिया, कृत्रिम श्वसन, पाचन तंत्र-पाचन तंत्र की सामान्य संरचना, स्वास्थ्यः निवारक औषधि और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन, वायु एवं वातायन, हवा की संरचना, श्वसन क्रिया, धुआं, धूल, जीवाणु आदि के कारण वायुमंडल में परिवर्तन वायु में अशुद्धता का कारण, रोग वातायन का अर्थ, रोगी एवं स्वस्थ व्यक्ति के लिए आवश्यक वायु, प्राकृतिक एवं कृत्रिम वातायन और वायु का शुद्धिकरण, गृह की स्वच्छता, जलनिकास एवं स्वच्छता अपशिष्ट का निष्पादन, संरक्षण जल वहन तंत्र ढालीय जल का निष्पादन, सेफ्टी टैंक एवं सीवर, जल संरचना, विशेषता, विभिन्न उद्देश्यों के लिए आवश्यकता जल स्रोत एवं भण्डारण, अशुद्धियां एवं उनका शुद्धिकरण, स्वास्थ्य, व्यायाम का शरीर के विभिन्नि तंत्रो पर प्रभाव, संक्रमण के स्रोत एवं माध्यम, संक्रमण के संचरण के प्रकार भोजन एवं पौष्टिकता, सामुदायिक पौष्टिकता, मातृ एवं शिशु की पौष्टिकता, रोगी का पौष्टिक आहार,गृह प्रबन्धन-पारिवारिक यंत्र व्यवहारिक भौतिकी, उपभोक्ता एवं बाजार अन्तरिक, डिजाइन, संस्थागत प्रशासन और प्रबन्धन का सिद्धान्त, पारिवारिक घर और घर की सजावट।

शिशु विकास- मानव विकास के सिद्धान्त, मानव विकास का इतिहास और नियम, प्रारम्भिक शिशु की शिक्षा स्कूल जाने के योग्य होने के पूर्व बच्चे का विकास।
वस्त्र एवं परिधान- परिधान के मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक तत्व भारत के पुराने परिधान, परिधान की डिजाइनिंग तथा कपड़े की संरचना, वस्त्रों का रंगना एवं छापना, काटना एवं सिलना।प्रसार शिक्षा- प्रसार शिक्षा की आवश्यकता, क्षेत्र एवं दर्शन, सामुदायिक विकास योजना, प्रौढ़ एवं अनौपचारिक शिक्षा, प्रसार शिक्षा की विधियां, शोधयंत्र एवं तकनीक और प्रारम्भिक सांख्यिकी।

संगीत वादन (तंत्र एवं अवनद्य)अधि स्वर, वाक्यों में तरब का प्रयोग, चिकारी, खरज, तोड़ा, तिहाई, जमजमा पेशकारा, टुकड़ा, पस, तिहाई, मूल लय एवं सम्बन्धित लय, विभिन्न प्रकार के भारतीय संगीत वाद्यों का ज्ञान तथा जो वाद्य विशेष अध्ययन किया है उसके विअंगों एवं मिलाने का विशेष ज्ञान, प्रमुख रागों की विशेषताएं, स्तर विस्तार के माध्यम से रागों का विकास एवं भेद अथवा प्रमुख तालों के विभिन्न लयों के साथ लयात्मक प्रकार, कठिन लयकारी की रचना, तालों को तथा पेशकारा, टुकड़ा, मुखड़ा एवं यस आदि को लिपिबद्ध करने की योग्यता, भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास, भारतीय संगीतज्ञों - सांगदेवे, तानसेन, अमीर खुसरों, भरत खण्डे, विष्णुदिगम्बर, गोपाल नायक की जीवनियां एवं उनकी देन। अपने वाद्य का विस्तृत अध्ययन, इतिहास एवं विकास। गत के प्रकार , उसके लक्षणं विभिन्न गतों का स्वर, ताल-लिपि में लिखना। अपने वाद्य के घरानों एवं उनके विशिष्ट कलाकारों के वादन-शैली का अध्ययन।निम्नलिखित तालों का विस्तृत अध्ययन- शिखर, बह्म, रूद्र, गजझम्पा, चारताल, धमार, झपताल लक्ष्मी ताल। तबला के विद्यार्थियों के लिए पेशकारा, कायदा, पलरा, रेला, तिहाई, बोर, लग्गी, चारबाग, फरमाइशी, कमाली, चक्रदारण झूलना के बोल आदि का अध्ययन व ताल-लिपि में लिखने का ज्ञान।
संगीत गायन
शास्त्रीय शब्दावली की परिभाषा एवं व्याख्या, स्पतक, तिब्रता, गुण और तारत्व, शुद्ध एवं विकृत स्वर, श्रुतियां शुद्ध स्वरों का आन्दोलन और तार पर शुद्ध स्वरों का स्थान, आलाप, तान मुर्की, कण कम्पन, मीड़, गमक, छूट की तानों के प्रकार (सपाट आदि), आरोह, अवरोहवादी का आलोचनात्मक अध्ययन, सम्बादी, अनुवादी, विवादी, अंश, न्यास अल्पत्व, बहुत्व, विशेष रागों के गाने अथवा बजाने की उपयुक्त धुने, पूर्णराग, उत्तर राग संधि प्रकाश राग, आश्रय राग, पामेल प्रवेशक राग, उत्तर और दक्षिण भारत के ठाट/मेल का वर्गीकरण और उससे रागों की उत्पत्ति, उत्तर भारतीय (हिन्दुस्तानी) और कर्नाटक पद्धतियों के स्वरों एवं श्रुतियों का तुलनात्मक अध्ययन, तानपूरे के विभिन्न अंगों का ज्ञान उसको मिलाना, ज्ञान, मारू विहाग, जोग, जोगकौस भैरव, वृन्दाबनी सारंग, दुर्गा, केदार मियां महार, बहार, मारवा, वैरागी, पुरिया, कल्याण, मधुवन्ती रागों का शास्त्रीय शैलीबद्ध विस्तृत अध्ययन, बंदिशों को स्वर ताल लिपि में लिखने का ज्ञान,

 

तर्क शास्त्र की प्रकृति तथा कार्यक्षेत्र। आगमन तथा निगमनात्मक तर्क शास्त्र। निष्कर्ष के नियम तथा समानता के सिद्धान्त।कलैसिकल तथा प्रतीकारात्मक तर्क। भाषा एवं प्रतीको का प्रयोग। सरल तथा जटिल वक्तव्य। प्रतिबन्धित वक्तब्य। बहस के प्रकार तथा सत्य। वक्तब्य के रूप, पुनरूवितयाँ, अन्तर्विरोध तथा आकस्मिकताएँ। प्रस्ताविक तर्क। एकात्मक तथा सामान्य प्रस्तावना, प्रस्ताविक-परिकल्पना। प्रस्ताविक, परिवर्ती तथा मौलिक संयोजक, सच-वृत्ति, स्ट्रोक तथा खंजर वृत्तियाँ।विचार के सिद्धान्त, बहस तथा वक्तब्यों की सार्थकता की परख करने की सत्य-तालिका प्रणालीः औपचारिक प्रमाण तथा सार्थकताः बहस की अमान्यता की प्रमाणिकता।निरपेक्ष, विभाजक तथा परिकल्पित न्यायवाक्य (निगमनिकता) आकृति तथा मनोदशा: वेन आरेख निममनिकता तथा श्रेणी की बुलियन गणित।परिभाषन सिद्धान्त। विधेय तथा परिमाणवाचक सूत्र। सीमित तथा मुक्त परिवर्तियाँ, सार्वभौमिक परिमाणिकताओं से सम्बन्धित निष्कर्ष। सीमित निष्कर्ष तथा अस्तित्वात्मक परिमाणिकताएँ।संबंधो का तर्क, सम्बन्धों की प्रकृति, लक्षण तथा विशेषताएँ। देशों की पहचान तथा निश्चित व्याख्याएँ। रसेल का व्याख्यात्मकता का सिद्धान्त, तार्किक विरोधभांस तथा तार्किक भिन्नता का सिद्धान्त।

 

 

युद्धः- परिकल्पना, प्रकृति, सीमा समकालीन विचारों के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा की अपधारणा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के वैकल्पिक माॅडल: शक्ति सन्तुलन, सामूहिक सुरक्षा, सामूहिक प्रतिरक्षा तथा गुट निरपेक्षता।निरस्तीकरण तथा शस्त्र नियंत्रण, पारंपरिक, नाभिकीय, जैविक तथा रसायनिक शास्त्र। घुसपैठ, प्रति घुसपैठ तथा आतंकवाद, अवधारण प्रयोग तथा महत्व। अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा का पालन तथा संयुक्त राष्ट्र संघ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कठिनाइयाँ तथा भारत की आजादी के बाद सुरक्षा की तलाश। भारत-पाक संघर्ष 1947-48 चीन-भारत संघर्ष- 1962 भारत पाक युद्ध - 1965भारत पाक युद्ध - 1971 करगिल-संघर्ष - 1999कश्मीर तथा उत्तर-पूर्व के संदर्भ में भारत की आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं पड़ोसी देशों के संदर्भ में भारत की वाह्य-सुरक्षा की समस्या। सुरक्षा तथा विकास। विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा भारतीय सुरक्षा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिकी आधार। समेकित वैज्ञानिक-नीति की आवश्यकता। रक्षा औद्योगिकरण तथा उपलब्धियाँ, अनुसंधान तथा विकास।नाभकीय नीति तथा दक्षण ऐशिया की सुरक्षा।अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद तथा विश्व सुरक्षा के उभरते आयाम।भारत की वर्तमान विदेश तथा रक्षा नीतियाँ 21वीं सदी का सुरक्षा परिदृश्य तथा भारत की सुरक्षा तैयारियां।

 

एकाउन्ट्स: वित्तीय लेखांकन - दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्त, समायोजन प्रविष्टियों के साथ अन्तिम लेखे तैयार करना, साझेदारी खाते, कम्पनी लेखे, अंशो एवं ऋणापत्रों का निर्गमन, अंशहरण एवं ऋणपत्रों का शोधन, लागत लेखांकन- लागत रेखांकन का अर्थ एवं उद्देश्य, लागत के तत्व, लागत लेखांकन की विधियां-इकाई लागत लेखांकन, ठेका लागत, लेखांकन, कर लेखांकन- महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषा- कृषि आय, करदाता गतवर्ष एवं कर निर्धारण वर्ष, निवास स्थान एवं कर दायित्व, प्रबन्धकीय लेखांकन- अर्थ, महत्व क्षेत्र, व्यावसायिक संगठन एवं प्रबन्ध: व्यावसायिक संगठन एवं क्षेत्र, पर्यावरण प्रदूषण एवं उद्योग-धन्धे, व्यावसायिक संगठन के स्वरूप, देशी एवं विदेशी व्यापार, प्रबन्ध-प्रबन्ध की प्रकृति उच्च आर्थिक सिद्धान्त एवं सांख्यिकीय रीतिया: उच्च आर्थिक सिद्धान्त - अर्थशास्त्र स्वरूप एवं क्षेत्र, व्यापार एवं अर्थशास्त्र का सम्बन्ध, तटस्थता वक्र विश्लेषण, उत्पत्ति के नियम, उत्पादन, प्रकार्य, जनसंख्या सिद्धान्त, प्रधान एवं पूरक लागत, औसत और सीमान्त लागत, व्यापार चक्र, राष्ट्रीय आय, सांख्यिकीय रीतियां आवृत्ति वितरण का विश्लेषण, सह-सम्बन्ध एवं प्रतीगमन, गुणात्मक सम्बन्ध, कालमाला का विश्लेषण, निर्देशांक, व्यापारिक पुर्वानुमान, सैद्धान्तिक बारम्बारता बंटन, बारम्बारता सामान्य बंटन, द्विपद एवं प्यायसन, भारतीय सांख्यिकी, विशेष रूप से जनसंख्या के संदर्भ में कृषि समंक एवं औद्योगिक समंक, भारतीय सांख्यिकी की कमियां एवं सुधार के सुझाव।

 

भूगोल की परिभाषा एवं विषय क्षेत्र - भूगोल विषय सम्बन्धी विभिन्न विद्वानों की अवधाराणा-हुम्बोल्डट, रिटर, रैटजेल, हैटनर, डेविस, वाइडल-डी-ला-ब्लाश, कार्ल सावर, पीटर हैगेट, विलयन वुंगी, हार्वे एवं स्मिथ। प्रमुख संकल्पनाएं - नियतिवाद, सम्भववाद, नव-नियतिवाद एवं पर्यावरण कारकवाद (पारिस्थितिकी तंत्र)।

भौतिक भूगोल: स्थल मण्डल - पृथ्वी की आन्तरिक संरचना, भूमण्डल का निर्माण, खनिज एवं चट्टानें, भूसंचलन, ज्वालामुखी एवं भूकम्प - अद्यतन सिद्धान्त, बलन एवं उनसे उत्पन्न स्थलाकृतियां, अपरदन चक्र (एवं उनकी भू आकृतिक छापे, भूमिगत जल, वायू, समुद्र एवं हिमनद के कार्य एवं सम्बनिधत स्थलाकृतियां)।वायुमण्डल: संरचना - सूर्यताप एवं ताप-बजट, तापमान का क्षैतिज एवं लम्बवत वितरण, तापमान विलोम की दशाएं, वायुदाब पेटियां एवं पवन, वायुदाब पेटियों का खिसकाव एवं उनका प्रभाव, आर्द्रता एवं वर्षण के प्रकार, बादलों के प्रकार एवं स्वरूप, शीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंधीय चक्रवात-उत्पत्ति, गतिविधि एवं मौसम पर प्रभाव, कोपेन और थार्नथ्वेट द्वारा विश्व जलवायु का वर्गीकरण।जलमण्डल-महासगरीय जल का तापमान एवं लवणता, महासागरीय धाराएं, ज्वारभाटा, महासागरीय निक्षेप, प्रवाल द्वीप एवं प्रवाल भित्तियां, उत्पत्ति वितरण एवं पर्यावरणीय महत्व।जैव मण्डल-वनस्पति के प्रकार एवं विश्व वितरण, सदाबहार वनों का पर्यावरणीय महत्व, वनस्पति एवं पारिस्थितिकी तंत्र, जैविक विविधता एवं उसका पारिस्थितिकीय महत्व, निर्वनीकरण की समस्या, वन संरक्षण।

 

विभिन्न शीर्षको में विभिन्न फसलों के उत्पादन-मृदा का चुनाव, किस्म, बुवाई का समय, बीजों का शोधन एवं बीज दर, खाद एवं खाद डालना सिंचाई, पादप सुरक्षा और बीज उत्पादन, खर-पतवार प्रबन्धन एवं फसल चक्र खर-पतवार के रोकथाम के सिद्धान्त एवं विधियां, कृषि के प्रकार एवं तंत्र, फसल चक्र का सिद्धान्त और फसलक्रम, फसल चक्र और फसलचक्र को प्रभावित करने वाले तत्व।विधि फल एवं सब्जी फसलों का निम्न शीर्षकों में अध्ययन-पोषण, महत्व उत्पत्ति और इतिहास, पादप विशेषता, प्रचार किस्म, जलवायु, मिट्टी, फसल चक्र, बुवाई एवं रोपाई, सिंचाई अन्तः कृषि, पौधा संरक्षण और बीज उत्पादन पौधशाला, बागवानी प्रबन्धन-फलो की प्रक्रिया एवं संरक्षण विभिन्न कृषि कार्यो में उसकी उपयोगिता, यांत्रिकीकरण और उसके प्रकार, विभिन्न कृषि दशाओं में यांत्रिकीकरण, सिंचाई की विधियां और विभिन्न फसलों में उसकी उपयोगता, संचित जल का गुण और आवृत्ति, सिंचाई की आधुनिक तकनीकि और उसकी आर्थिकता।पशु प्रजनन- प्रजनन क्रिया, उद्देश्य, विधि, पशुओं और पक्षियों की विभिन्न किस्में, पशुओं के चयन की विधियां पशुओं के पोषण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा, पशुओं के रोग-पशुओं के विभिन्न रोगों का विवरण, लक्षण, निदान और उपचार। दुग्धशाला की सफाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सीवर और पर्यावरण का सूक्ष्म जैविकी, दुग्ध उत्पादन और विपणन दुग्ध का स्वच्छ उत्पादन, लैक्टिक अम्ल, बैक्टीरिया एवं अन्य सूक्ष्म जीवों का मक्खन, पनीर, फरमेंटेड दुग्ध के उत्पादन में योगदान, सूक्ष्म जीवों द्वारा विविध दुग्ध उत्पादन संतुलित पशुचारा की आवश्यकता, विभिन्न प्रकार के पशुओं एवं पक्षियों के लिए और उसका महत्व तथा सीमा।

 

यांत्रिकः मात्रक एवं विभाएं अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति के सन्दर्भ में सदिशों की गणना (योग, घटाना एवं गुणा), प्रवणता, डाइवर्जेन्स एवं कर्लद्रव्यन केन्द्र, रेखीय संदेश, बलयुग्म, कोणीय संवेग, संरक्षी नियम, अभिकेन्द्रीय बल एवं त्वरण, केन्द्रीय बल, संरक्षी बल, स्थितिज ऊर्जा, गोलीय रोल एवं ठोस गोले के कारण गुरूत्व विभव एवं क्षेत्र व्युत्क्रम वर्ग नियम के अन्तर्गत गति, कोलर के नियम, उपग्रह की प्रक्षेप्य गति, घूर्णन गति, कोणीय त्वरण, भौतिकी के सन्दर्भ में जड़त्व की परिभाषा, प्रत्यास्थताः प्रतिबल एवं विकृति हुक का नियम, वैद्युत स्थिरांक एवं उनके सम्बन्ध छड़ झुकाव, बेलनों में ऐठन, पृष्ठ तनाव-पृष्ठ तनाव का अणुक सिद्धान्त, संसजक एवं आसंजक बल, पृष्ठ ऊर्जा, कोशिकत्व क्रिया, स्पर्श कोण, अतिरिक्त दबाव, मेनिस्कस की आकृति, श्यानताः आदर्श प्रवाह, अविरतता का समीकरण, धारा रेखीय प्रवाह, बरनौली का सिद्धान्त, श्यान प्रवाह, श्यानता गुणंक, पाउ सौली का समीकरण, स्टोक का नियम।

उष्मा चालनः स्थाई अवस्था उष्मा चालकता, उष्मा के एकदिशीय प्रवाह का फोरियर समीकरण, बुरे चालकों की चालकता। विकिरणः विद्युत चुम्बकी तरंगों के रूप में विकिरण उत्सर्जन अवशेषण क्षमता, खोखले बर्तन में विकिरण, कृष्णीका से विकिरण, किरचाफ के नियम, तीव्रता एवं ऊर्जा घनत्व दाब एवं ऊर्जा घनत्व, न्यूटन का शीतलन का नियम, स्टीफन स्थिरांक, स्टीफन-वोल्टजमैन नियम, सौर स्थिरांक एवं सूर्य का ताप एवं कृष्णीका विकिरण के स्पेक्ट्रम में उर्जा का वितरण, वीन्स का वितरण का नियम, वीन्स का विस्थापन का नियम, रैले-जीन्स का नियम, प्लांक का नियमः ज्यामितीय प्रकाशिकीः फर्मेट सिद्धान्त एवं इसके अनुप्रयोग, समान कोण वाले प्रकाशिक वस्तु का कार्डिनल बिन्दु, पतले लेन्सों का संयोग, लेन्सों मे विपलन, प्रज्मि एवं लन्सों में अवर्णता, दृष्टिका, अप्लान्टीज्म, दृश्य क्षेत्र एवं क्षेत्र की कहराई, दूरदर्शी एवं सूक्ष्मदर्शी की आवधन एवं विभेदन क्षमता, आंख् का विभेदन क्षमता, प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण

 

सामान्य कार्बनिक रसायन- मीथेन, ईथेन, ईथीन, ईथाइन तथा बेन्जीन का कक्षीय प्रदर्शीकरण। आबंधों की ध्रवीयता-प्रेरणिक, अनुनाद एवं त्रिविमीय विन्यासी प्रभाव तथा उनका कार्बनिक यौगिकों की अम्लीयता एवं क्षारीयता पर प्रभाव, कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण एवं नामकरण-(एलिफैटिक एवं एरोमैटिक दोनो का ) कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रिया विधि-संमागी एवं विषमांगी विदलन, नाभिकस्नेही इलेक्ट्रानस्नेही तथा मुक्तमूलक। एलिफैटिक प्रतिस्थापन, योगात्मक एव निराकरण अभिक्रियाओं की क्रियाविधि समावयवता-संरचनात्मक एवं त्रिविम समावयवता। संरूपण का प्रारम्भिक विवेचनप (ईथेन तथ एन-ब्यूटेन मात्र) एल्कूल एल्कीन, एल्काइन, अल्किल, हेलाइड, एल्कोहाल, एडहाइड कीटोन, कार्बातिसलिक अम्ल एवं उनके व्युत्पनन (सन्निहित अभिक्रियाओं) की क्रियाविधि भी उपयुक्त स्थान पर दी जाए) इनके बनाने की विधियां एवं इनके गुण ग्रियनार्ड अभिकर्मक-बनाने की विधियां एवं संशलेषिक अनुपयोग, क्रियाशील मेथिलीन समूल वाले यौगिक-एसीटो, एसीटिक एस्टर तथा मैलोनिक एस्टर केवल कीटो-ईनाल, चलावयवता।कार्बोहाइड्रेट- वर्गीकरण ग्लूकोस एवं फ्रैक्टोस की वलय संरचना एवं विन्यास परिवर्ती, घूर्णन, कार्बोहाइड्रेट, श्रेणी में अन्तस्परिवर्तन, ऐरोमैटिक योगिक-एरोमैटिक हाइड्रोकार्बनों को बनाने की सामान्य विधियां, ऐरोमैटिकता प्रतिस्थापन-नाइट्रेशन, हैलोजनीकरण, सल्फोनीकरण, फ्रीडलक्राफ्ट, एक्किलीकरण तथा एसीलिकरण अभिक्रियाओं की क्रिया विधि। क्लोरोबेन्जिन नाइट्रोबेन्जीन, एनिलीन, फिनॉल बेन्जलडिहाइड, बेन्जोइक एसिड, बेन्जीन सल्फोनिक एसिड थैलिक ऐसिड, सैलिसिलिक एसिड एवं सिनामिक एसिड कार्बनिक यौगिक का बनाना एवं उनके गुण।

 

अकार्डेटा - विभिन्न फाइलमों का समान्य सर्वेक्षण तथा वर्गीकरण। प्रोटोजोआ में पोषण एवं प्रजनन, इन्टअमीबा तथा परामीशियम की संरचना एवं जीवन वृत्त। सीलेन्टेªट्स में बहुरूपता, ओबेलिया की संरचना एवं जीवन वृत्त। टीनिया की संरचना एवं जीवन वृत्त, वूचेरेरिया बैंक्राप्टी का जीवन वृत्त। पीलीकोटा में अनुकूली विकिरण, हिरूडिनेरिया की संरचना तथा जीवन वृत्त। कस्टेसी में डिम्भक रूप एवं परजीविता, पेलीमान की संरचना एवं जीवनवृत्त। मोलस्का में अनुकूली विकिरण, पाइला की संरचना एवं जीवन वृत्त। इकाइनोडर्मेटा में डिम्भक रूप स्टार फिस की संरचना एवं जीवन वृत्त।कार्डेटा - विभिन्न वर्गो का सामान्य सर्वेक्षण तथा वर्गीकरण। कार्डेटा तथा चतुष्पादों की उत्पत्ति। हर्डमानिया एवं एम्फिआक्सस की संरचना एवं प्रबंधन अभिलक्षण। मछलियों में चलन, स्कालियाओडान की संरचना एवं प्रकार्य। एम्फिबिया में पैतृक रक्षण। यूरोमैस्टिक्स की संरचना एवं प्रकार्य, भारत के विषैले एवं विषहीन सर्प। पक्षियों में प्रवसन एवं वायुवीय अनुकूलन, कोलम्बा की संरचना एवं प्रकार्य। प्रोटीथीरिया, मेटाथीरिया एवं ड्यूथीरिया का सामान्य अभिलक्षण तथा बंधुता। कशेरूकी के पाचन, परिसंचरण, श्वसन, उत्सर्जन एवं जनन तंत्रों की तुलनात्मक शारीरिकी

विषाणु-परिभाषा, प्रकृति, संरचना, पारगमन तथा विषाणुजनित रोगों के लक्षण एवं नियंत्रण। जीवाणु-जीवाणु का वर्गीकरण, संरचना, प्रजनन, जीवाणु की सीमा तथा महत्व। लाइकेन-प्राप्ति तथा प्रकृति, संरचना, प्रजनन, वर्गीकरण और आर्थिक महत्व। शैवाल-फ्रिच का वर्गीकरण, प्राप्ति, प्रकृति तथा थैलस की संरचना/ग्लीओट्राइकिया आसीलेटोरिया, साइटोनिमा, क्लेमाइडोमोनास, वालवाक्स, उडोगोनियम, कारा, बैट्रेकोस्परमम फ्यूकस, एक्टोकार्पस एवं पेडाइना की प्रकृति संरचना एवं जीवन चक्र।
ब्रायोफाइटा- रिक्सिया, मार्केन्सया, पेलिया, ऐन्थेसीरास, स्फैग्नम एवं फ्येनेरिया स्फैनेरिया की प्राप्ति वितरण संरचना एवं जीवन वृत्त। आवृतबीजियों की वर्गिकी- आवृतबीजियों की उत्पत्ति वर्गीकरण (कृत्रिम, प्राकृतिक, फाइलोजेनेटिक) बेन्थम हूकर सिस्टम के विशेष सन्दर्भ में नामकरण, रैननकुलेसी, क्रुसीफेरी, कैपरिडेसी, कुकुरबिटेसी, कम्पेजिटी, मालवेसी, रोजेसी, लीग्यूमिनोसी, सोलैनेसी, एकैन्थेसी, वर्बीनेसी, लैविएटी, इयूफोरविएसी, पामेसी, म्यूसेसी, एवं ग्रैमिनी कुल का अध्ययन क्षेत्र तथा पादपालय तकलीक।
आर्थिक वनस्पति विज्ञान- अग्रलिखित पौधों का वितरण गुण एवं उपयोगिता-लकड़ी-सागौन, शीशम, साखू, चीड़। रेशा-कपास, जूट, नारियल, सनई। तेल-सरसों नारियल, अरंड, मूंगफली। शर्करा-गन्ना, चुकन्दर। औषधिय-ओपियम, सर्पगन्धा। मसाले-धनियाँ, इलायची, कालीमिर्च, लवंग। पेय- चाय, काफी। आकारिकी एवं आन्तरिकी- पादप शरीर एवं उसका विकास, विभाज्येजक तथा परिपक्व ऊतक, कायिक तथा जनक भागों की संकल्पनाएं, जड़ तथा तने में सामान्य तथा असंगत द्वितीयक वृद्धि भारत में पौध आन्तरिकी विकास। कोशिका, ऊतक एवं अंग कल्चर तकनीक। कोशिका विज्ञान तथा अनुवंशिकी- कोशिका विज्ञान का इतिहास, गुणसूत्र की संरचना तथा कार्य, गुणसूत्री विपधन, कोशिका विभाजन तथा इसका महत्व।शरीर क्रिया विज्ञान-पादप कोशिकाओं का जल संबंध। वाष्पोत्सर्जन, लवण पदग्रहण, प्रकाश संश्लेषण, नाइट्रोजन, स्वांगीकरण, श्वसन, वसा, उपापचय, वृद्धि प्रजनन तथा गमन की शरीर क्रिया विज्ञान। मृदा विज्ञान-मृदा लक्षण, मृदा परिच्छेदिका, मृदा सम्बन्ध, भारत के मृदा प्रकार। निर्मेय मृदा, ऊसर मृदा का उद्धार मृदा अपरदन तथा भूमि संरक्षण।

 

गणित: समीकरण सिद्धान्त, मूलों के सममित फलन, अंकगणितीय गुणोत्तर व हरात्मक श्रेणियां, प्राकृतिक संख्याओं के वर्गो और घनों के पदों से बनी श्रेणी का योग। क्रमचय और संचय, द्विपद प्रमेय, चारघातांकीय और लघुगण्कीय श्रेणियों का योग, प्रायिकता-योग व गुणन के सिद्धान्त।सारणिकः- परिभाषा, उपसारणिक व सहखण्ड 3ग्3 क्रम तक के सारणिक का विस्तार, कैमर के नियम से द रेखीय ;दत्र3द्ध समीकरणों के निकाय का हल।आब्यूहः- अब्यूह के प्रकार 3ग्3 क्रम तक के आब्यूहों का योग और गुणनफल, परिवर्त आव्यूह सममित और विषम सममित आब्यूह, आब्यूह का सहखण्डन, आब्यूह का प्रतिलोम आब्यूह की सहायता से तीन अज्ञात के चुगपत का समीकरण का हल।समुच्चय सिद्धान्त व संक्रियाये- वर्ग सम नियम, साहचर्य नियम, क्रम विनिमेय नियम, वितरण नियम, सर्व समिकायें, डिमोर्गन का नियम, तुल्यता सम्बन्ध, प्रतिचित्रण, प्रतिलोम प्रतिचित्रण, प्रतिचित्रणों का संयोजन, पियानों के अभिगृहीत तथा आगमन अभिगृहीत के प्रयोग।

समूह सिद्धान्तः- आंशिक समूह और समूह, समाकारिता, उपसमुच्चय द्वारा जनित उपसमूह, चक्रीय समूह, किसी अवयव की कोटि, चक्रीय समूह के उपसमूह, सह समुच्चय वियोजन, लैगराँन्ज प्रमेय। प्रसामान्य उपसमूह और विभाग समूह, समाकरता का मौलिक प्रमेय, प्रथम ओर द्वितीय एक के समाकारिता प्रमेय।

रैखिक गणितः- सदिश समष्टि के उदाहरण, सदिशों का रैखिक संयोजन, रैखिक अश्रितता, रैखिक अनाश्रितता, आधार व विमा, परिमित विमीय सदिश समष्टि, उपसमष्टि, उपसमष्टि जनन, विभाग समष्टि प्रत्यक्ष योग।

रैखिक रूपान्तरण और आव्यूहः- उदाहरण, रैखिक रूपान्तरण का बीजगणित, समाकारिता का मौलिक प्रमेय और इसके प्रयोग, ती समष्टि और द्वैती आधार, रैखिक रूपान्तरण का परिवर्त, रैखिक रूपान्तरण का आव्यूह निरूपण, आधार का परिवर्तन और इसका आव्यूह निरूपण पर प्रभाव, रैखिक रूपान्तरण की व आव्यूह की कोटि रैखिक रूपाप्तरण की शून्यता, कोटि शून्यता प्रमेय अभिलाक्षणिक मान व अभिलाक्षणिक सदिश, कैली हैमिल्टन प्रमेय, कैली हैमिल्टिन प्रमेय की सहायता से ब्युत्क्रमणीय आब्यूह का प्रतिलोम निकालना। ध्रुवीय निर्देशांकों (द्विविमीय) में शांकव के मानक समीकरण, गोले, शंकु, बेलन, केन्द्रीय शांकवज व त्रिविमीय कार्तीय निदेशांको मे मानक समीकरण व इनके प्रारम्भिक गुण।

त्रिकोणमितीयः- त्रिकोणमितीय समीकरण, त्रिभुज का हल परिगत, अन्तः एवं बाहय वृत्तों की त्रिज्यायें और गुण, ऊचांई और दूरी, प्रतिलोम वृत्तीय फलम के साधारण गुण, सम्मिश्र संख्याओं के योग और गुणनफल, मापांक कोणांक रूप, हर का परिमेयीकरण डिमाइवर प्रमेय और इसका प्रयोग। इकाई के मूल सम्मिश्र संख्याओं के फलन-चरघाताकीय, वृत्तीय, हाइपरबोलिक लघुगणकीय, व्यापक चरघातांकीय, प्रतिलोम वृत्तीय व प्रतिलोम हापरबोलिक फलन-वास्तविक व अधिककल्पित भागों में पृथक्करण।

Section 1- language
1.Unseen Passage for Comprehension.
2. Usage, Tense,Spelling,Punctuation,Narration,Vocabulry and Idioms and Phrases.

SECTION 2- LITERATURE
a. Forms of liteature and figures of speech.
b.Authos and work-William Wordswarh and John keats,Charleslamb,P.B. Shelly,Charles Dickens,Matheu Arnold, Alfred tennyson,thomas Hardy;T.S. Eliot,Kamala Das Mulkraj Anand, Nissim Ezzekiel;Robert Frost,Walt Whitman ,Ernest Hemmigway,William Faulkner and William Shakespeare.

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