UP TGT ( Trained Graduate Teachers )


प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक परीक्षा

  • UP TGT ( Trained Graduate Teacher) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परीक्षा का आयोजन किया जाता है |
  • यूपी 1982 के अधिनियम संख्या 5 के रूप में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक अधिनियम द्वारा पारित इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम , 1921 के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिक्षकों के चयन के लिए माध्यमिक शिक्षा ( सेवा चयन बोर्डों ) अधिनियम, 1982 की स्थापना की गई।
  • यह परीक्षा राज्य स्तर पर आयोजित की जाती है। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह परीक्षा लोकप्रिय है। टीजीटी के लिए ग्रेजुएट और बीएड होना जरूरी है।
  • तो पीजीटी के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड डिग्री आवश्यक है। टीजीटी पास शिक्षक छठी क्लास से लेकर 10वीं तक के बच्चों को पढ़ाते हैं।
  • तो पीजीटी के शिक्षक सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।

 

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  • माध्यमिक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति काे हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 और उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा नियंत्रित किया गया था।
  • यह महसूस किया गया कि उक्त अधिनियम के प्रावधानों और नियमों के तहत शिक्षकों के चयन के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष कुछ समय नहीं था।
  • इसके अलावा, चयन के क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा प्रतिबंधित किया गया था। इस पर प्रतिकूल उपयुक्त शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा के स्तर को प्रभावित किया।
  • यह इसलिए, राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग का गठन करने, प्रधानाध्यापकों, व्याख्याताओं, हेड-स्वामी और L.T. चयन करने के लिए आवश्यक माना जाता था।
  • ग्रेड शिक्षकों और क्षेत्रीय स्तर पर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्डों का चयन करें और C.T./J.T.C./B.T.C में अपेक्षाकृत कम पदों के लिए उपलब्ध उपयुक्त उम्मीदवार बनाने के लिए। ऐसे संस्थानों के लिए ग्रेड।
  • बोर्ड के एक निगमित निकाय किया जाएगा। यह उत्तर प्रदेश भर शक्तियों का प्रयोग करेगा और इसका मुख्यालय इलाहाबाद में किया जाएगा।
  • एटॉमिक एनर्जी एजुकेशन सोसाइटी ने देश भर में स्थापित अपने स्कूलों / जूनियर कॉलेजों के लिए विभिन्न पदों पर रिक्तियों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी की है।
  • जारी की गई कुल 48 रिक्तियों में प्रधानाचार्य का 1 पद, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) के 14 पद,  ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) के 24 पद, ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (लाइब्रेरियन) का 1 पद, ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (स्पेशल एजुकेटर) के 7 पद और जूनियर हिंदी ट्रांस्लेटर का 1 पद शामिल हैं। 

  • प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक ( टीजीटी ) रु। 9,300 - रुपये। 34,800 (बेसिक ) से अधिक रुपये । 4600 ग्रेड पे ।

  • इस रोजगार पद पर आवेदन करने के लिए शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था से किसी भी विषय में परास्नातक की डीग्री  होनी चाहिए। 

 

 

एग्जाम पैटर्न


उत्तर प्रदेश टीजीटी की परीक्षा दो चरणों में संपन्न होती है :

  • लिखित परीक्षा (Written exam)
  • साक्षात्कार (Interview)

वहाँ एक वस्तुनिष्ठ पेपर निम्नलिखित पर दो भागों में आयोजित किया जाएगा:

  • भाग प्रथम (Part I) में अंग्रेजी और हिंदी से संबंधित प्रश्न हाेते है।
  • भाग द्वितीय(Part II) में सामान्य ज्ञान , हिंदी और विषयों के अध्ययन के लिए चुनाव के रूप में
    सवालों के प्रकार : एकाधिक विकल्प के आधार उद्देश्य रूपों में सवाल होते है।

  • प्रत्येक विषय के अभ्यर्थियों के लिए अलग अलग परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा में कुल 125 बहुविकल्पीय प्रश्न (multiple choice questions) होते हैं |
  • प्रत्येक प्रश्न के 4 विकल्प होते हैं तथा अधिकतम अंक 425 होते हैं। जिसमें नकारात्मक मूल्यांकन (negative marking) नहीं होता है।
  • इस प्रश्नपत्र के लिए अधिकतम समय 2 घंटा होता है ।   

जॉब अलर्ट और समाचार

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एग्जाम में सफल होने के लिए रणनीति, सुझाव और तरकीब

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पाठ्यक्रम


SECTION 1-LANGUAGE
a. Unseen Passage for Comprehension.
b. Part of speech, spelling, Punctution,Vocabulary, Tense, Narration, PreostionUsage, Transformation and Agreement.
SECTION 2- LITERATURE
a. Forms of literature
b. Authors and their work-Shakespeare,John Miltion,William Wordsworth  and John Glaswarthy.

-हिन्दी साहित्य का इतिहास- आदिकाल, भक्तिकाल, (संत काव्य, सूफी काव्य, रामकाव्य, कृष्ण काव्य) रीतिकाल, आधुनिक काल, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयी क‌विता।
-हिन्दी गद्य साहित्य का विकास- निबन्ध, नाटक उपन्यास, कहानी, हिन्दी गद्य की लघु विधाएं-जीवनी, आत्मकथा, सस्मरण रेखा चित्र, यात्रा-साहित्य, गद्यकाव्य व्यग्य।
-हिन्दी के रचनाकार एवं उनकी रचनाऐं काव्य के भेद रस- अवयव भेद, छन्द, अलंकार, शब्दालंकार, अर्थालंकार, काव्यगुण, काव्य दोष।
-हिन्दी की बोलियॉ, विभाषाएं, हिन्दी की शब्द सम्पदा, हिन्दी की ध्वनियॉ देवनागरी लिपि नामाकरण, विकास विशेषताएं, त्रुटियॉ सुधार के प्रयत्न।
-व्याकरण, लिंग वचन, कारक, सन्धि, समास, वर्तनी, वाक्य, शुद्धिकरण, शब्द रूप-पर्यायवाची, विलोम, श्रुति समभिन्नार्थक शब्द, वाक्यांश के लिए एक शब्द, मुहावरा, लोकोक्ति।

-गद्य, पद्य एवं नाटक-अधोलिखित, ग्रन्थों के निर्धारित अंकों के आधार पर शब्दार्थ, सूक्तियॉ, -शब्दों की व्याकरणात्मक टिप्पणी, चरित्र चित्रण तथा ग्रन्थकर्ता का परिचयः- कादम्बरी-(शुकनासोपदेश मात्र), शिवराज विजयम्, (प्रथम निःश्वास), किरातर्जुनीयम् ( प्रथम सर्ग) मेघदूतम् (सम्पूर्ण) नीतिशतकाम् (सम्पूर्ण) अभिज्ञान शाकुन्तलम् (चतुर्थ अंक) और उत्तर राम चरितम् (तृतीय अंक)। -व्याकरण-डा0 राम बाबू सक्सेना कृत “संस्कृत व्याकरण प्रवेशिका” के आधार पर सन्धि, समास, कारक एवं प्रत्याहार का परिचय, अकारान्त, इकारान्त उकारान्त, ऋकारान्त, पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसक लिंग शब्दों का रूप,संस्कृत सुभाषित एवं सूक्तियों का परिज्ञान, वाक्य परिवर्तन और अशुद्वि परिमार्जन। -व्याकरण, अनुवाद, पद्य आदि की पाठन विधियो का सामान्य परिचय।

उर्दू जबान की मुखतसर तारीख (पैदाइश और तरक्की), दिल्ली और लखनऊ के दबिस्तान, उर्दू शाइरी का इर्तिका, उर्दू अस्नाफे नजम-ओ नस्त्र (नावेल, दास्तान, अफसाना, ड्रामा, गजल, कसीदा, मंसनवी, नज्म मर्सिमा) तरक्की पसन्द तहरीक (इब्तिवा और इर्तिका), मशहूर किताबे- बाग-ओ बहार, फसानए अजाइब, फसानए आजाद, शेरूल मुकद्दम-ए-अनीस-ओ-दबीर, हजारी शाहरी मशहूर मुसन्निफीन और शादूर-मीर अम्मन, रजब अली बेग सुरूर सर सय्यद अबुल कलाम आजाद, मौलाना मुहम्मद हुसैन आजाद, मीर, गालिब, मोबिन, इकबाल, चकबस्त, अकबर इलाहाबादी, फिराक, फैज, कबाइद जमाना (माजी, हाल, मुस्तकाबिल), तजकीर-ओ-तानीस, जमा वाहिद, तशबीह, इस्तेआरा, तजनीस, इस्म, सिफ्त जमीर, फेल, हुस्नेतालीन, तजाद, लफ-ओ-नश्र मुहावरे और कहावतें, जदीद दौर के मशहूर शाइर और अदीब, अख्बारात, रिसाले, अफसानानिगार, नावेलनिगार।

विमा एवं मापन-एस0आई0पद्धति में मूल मात्रक व्युत्पन्न मात्रक, इकाईयों का एक पद्धति से दूरी पद्धति में परिवर्तन, विमीय विधि से समीकरणो का सत्यापन, अदिश एवं सदिश राशियॉ। गति एवं बल-सापेक्षिक गति, न्यूटन का सपेक्षिक गति का सिद्धान्त विस्थापन, चाल एवं वेग, रेखीय गति, कोणीय गति और उनका संबंध, सरल रेखीय गति सतत् एवं विभिन्न गतियॉ, जागत्व का सिद्धान्त, बल त्वरण, गति के समीरण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा रेखी संवेग एवं कोणीय संवेग, उर्जा एवं संवेग का संरक्षण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा का एक दूसरे में परिर्वतन, गुरूत्वीय एवं जड़त्वीय द्रव्यमान, न्यूटन के गति के नियम, क्रिया एवं प्रतिक्रिया, घूर्णन गति, बलयुग्म, क्षद्मबल, अपकेन्द्रिय एवं अभिकेन्द्रियबल, कोरियलिस बल न्यूटन गुरूत्व का नियम, गुरूत्वीय त्वरण आदि।

 -द्रव्य-प्रकृति एवं व्यवहार द्रव्य के प्रकार, तत्व एवं उनका वर्गीकरण (धातु एवं अधातु) यौगिक एवं उनके मिश्रण।
-रासायनिक संयोग के नियम-स्थिर, अपवत्र्य एवं व्युत्क्रम अनुपात का नियम, गैलुसक का गैसीय आयतन संबंधी नियम, मिशरलिक का समाकृतित्व का नियम।
-पदार्थ की संरचना-डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त, परमाणु, अणु एवं उनके अभिलक्षण।
-परमाणु संरचना-इलेक्ट्रान प्रोटान तथा न्यूट्रान की खोज। रदरफोर्ड का अल्फा किरण प्रकीर्णन प्रयोग तथा नाभिक की खोज।
-रदरफोर्ड, बोहर एवं समरफील्ड के परमाणु माडल। क्वाटम संख्याएं, आधुनिक परमाणु सिद्धान्त।
-रेडियों सक्रियता-रेडियों सक्रियता की खोज, रेडियों सक्रिय किरणें एवं उनके गुण, अद्र्धायु काल एवं औसत आयु, रेडियों सक्रिय क्षय के नियम, नाभिकीय विखण्डन एवं सलयन, कृत्रिम रेडियों सक्रियता। समस्थानिक, सम्भारी एवं समन्यट्रानिक।

 विभिन्न संघो के निम्नलिखित प्रतिनिधियो  का वर्गीकरण, स्वभाव, संरचना तथा जीवन चक्र प्रोटोजोआ-एन्टी अमीबा, प्लाज्मोडियम, पैरामीसियम, युग्लिना, प्रोटोजोआ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, पोरीफेरा ल्युकोसोलिनिया, साइकॉन सीलेन्ट्रेटा हाइड्रा, कओबिलिया, आरिलिया, हेल्मिन्थ फे्रशियोला, टीनिया, ऐस्केरिस, हेल्मिन्थ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, एनिलिडा, नीरिस, फे्ररिटिमा, जोक, आथेपोडा, तेल चट्टा, मस्का, मच्छर, झीगा, कीटों का आर्थिक महत्व मोलस्का-यूनियनों पाइला, इकाइनोडरमेटा-सितार्रा मछली, कोर्डोटा, प्रोटोकार्डेटा हर्डमानिया, एम्फियाँयाक्सस, वटेबेटा, मतस्य स्कोलियोडाॅन ऐम्फिबिया-राना, रेप्टिलिया-यूरोमेस्टिक्स अथवा कोई अन्य, छिपकली, एवीज, कोलम्बा, गैमेलिया-खरहा। कोशिका विज्ञान-कोशिका की सूक्ष्म संरचना, सूत्री व अर्थसूत्री विभाजन, युग्मक-जनन, आनुवंशिकी-मेण्डल वाद, सहलग्नता व जीन विनियम, सुजनिकी, जैव विकास, विकास के प्रमाण, विकास के सिद्धान्तलेमार्कवाद, नव-लेमार्कवाद, हार्विनवाद, नव-डार्विनवाद। 

 वणिज्य एवं गणित-काम समय और चाल समय, चक्रवृद्धि ब्याज, बैकिंग, कराधान, प्रारम्भिक नियमो का प्रवाह सचित्र संख्यिकी-बारंबारता बटन, सांख्यिकी आकड़ों का आलेखीय निरूपण, केन्द्रीय प्रवृत्ति की मापे, विक्षेपण की मापे, जन्म/मृत्यु सांख्यिकी, सूचकांक बीज गणित-करणी, बहुपद और उनके गुणनखण्ड, लघुगणक, दो अज्ञात राशियो के रेखिय समीकरण, बहुपदों के महत्तम समापर्वतक और लघुत्तम समापवत्र्य एक घातीय तीन अज्ञात राशियों के युगपत समीकरण, द्विघात बहुपद के गुणनखण्ड, द्विघात समीकरण, अनुपात व
समानुपात, संख्या पद्धति समुच्चय संक्रियएं प्रतिचित्रण त्रिकोणमितीय सर्वतमिकायें, त्रिकोणमितीय समीकरण, त्रिभुज का हल, परिगम अन्त एवं वाहय वृत्तों की त्रिज्यायें एवं गुण, प्रतिलोम वृत्तीय फलनों के सामान्य गुण। तथा गुणनफल, डिमाइवर प्रमेय और इसका प्रयोग उचाई और दूरी सम्मिश्र राशियों के चरघातांकीय फलन, वृत्तीय फलन एवं हाइपर। 

 (अ) आहार एवं पौष्ष्टिकता-पौष्टिकता की सकं लपना, आहार की सरं चना, एवं कार्य, संस्तुलित आहार, आहार वर्ग का वर्गीकरण और उनका स्रोत, पौष्टिकता, अल्पता के रोग, आहार तैयार करना, खाद्य संरक्षण एवं मिलावट, विभिन्न रोगो जैसे ज्वर, टाइफाइड, अल्सर, मधुमेह, गुर्दा, एवं दिल रोग के रोगियों के लिए आहार। मानव शरीर की संरचना, भोजन का पालन, अवशोषण और चयापचय, सामान्य रसायन।
(ब) बाल विकास-बच्चों की वृद्वि एवं विकास, बच्चों की मृत्यु एवं रूग्णता, विद्यालयीय स्वास्थ्य, विवाह एवं परिवार।
(स) वस्त्र एवं सिले कपड़े वस्त्र, रेशें का वर्गीकरण और उसका रसायन, परिधान की बनावट एवं उसकी सजावट, कपड़ों की रंगाई एवं धुलाई विभिन्न अवसरों और विभिन्न मौसमो में लिवाश का चुनाव उसका निर्माण। 

 -सौर मण्डल-उत्पत्ति सौर मण्डल में पृथ्बी की आकृति एवं गतियां, पृथ्वी की गतियों के प्रभाव, सूर्य ग्रहण एवं चन्द्रग्रहण, अक्षांश देशान्तर का निरूपण, ग्लोब पर किसी स्थल की अवस्थिति का निर्धारण, स्थानीय एवं प्रामाणिक समय का वायु मण्डल-वायुमण्डल की संरचना, सर्यू ताप एवं उसे प्रभावित करने वाले कारक, तापमान का क्षैतिज एवं उध्र्वाकार वितरण, तापमान विलोमता, वायुदाव पेटियां एवं सनातन पवन, महत्वपूर्ण स्थानीय पवन, वर्षण की प्रक्रिया-वर्षा, पाला कुहरा आदि संवाहनिक, धरातलीय एवं चक्रवातीय वर्षा, विश्व के जलवायु प्रदेश, दैनिक मौसम मानचित्र में प्रयुक्त सकंतो की पहचान।
-जल मण्डल-महासागरो का उच्चावचन, महासागरीय तापमान एवं लवणता, महासागरीय धारायें उत्पत्ति प्रवाह दिशा एवं जलवायुविक प्रभाव, ज्वार भाटा प्रक्रियायें एवं उत्पत्ति के सिद्वान्त।
-जैव मण्डल-संरचना, वनस्पति के प्रकार एवं विश्व वितरण तथा संबंधित वन्य जन्तु भाग। 

 पूरा ऐतिहासिक संस्कृतियां पूर्व पाषाण युग, मध्य पाषाण युग, नव पाषाण युग, इनकी प्रमुख विशेषताएं, प्राचीन युग-सिन्धु घाटी, सभ्यता प्रमुख विशेषताएं, वैदिक काल, पूर्व वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक जीवन, धार्मिक आन्दोलन जैन धर्म बौद्ध धर्म, भागवत धर्म, और शैव धर्म, मौर्यकाल राजीनति इतिहास, समाज एवं संस्कृति, गुप्त राजवंश राजनीति इतिहास और समाज एवं सस्कृति, चोल वंश प्रशासन, भारत में इस्लाम का आगमन एवं प्रभाव आक्रमण एवं प्रभाव, दिल्ली सल्तनत की स्थापना-कुतुबुद्दीन ऐबक का योगदान, इल्तुत्मिश का मूल्यांकन, बलवन का जीवन चरित्र और उपलब्धियां अलाउद्दीन खिल्जी की उपलब्धियां, तुगलक वंश-गयासुद्दीन तुगलक, मोहम्मद बिन तुगलक, फिरोजशाह तुगलक, तैमूर का आक्रमण बहमनी साम्राज्य, सैय्यद एवं लोदी वंश, मुगल वंश बाबर, हुमायू अकबर, जहांगीर, शाहजहा और औरगंजेब, छत्रपति शिवाजी जीवन चरित्र एवं उपलब्धियां आधुनिक भारत (1858-1950 ई0) सन् 1857 ई0 में प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का कारण, स्वरूप एवं परिणाम, उन्नीसवीं शताब्दी में भारतीय पुर्नजागरण तथा सामाजिक धार्मिक आन्दोलन, राष्ट्रीय आन्दोलन में  महात्मा गाँधी का योगदान, स्वतन्त्रता की प्राप्ति तथा विभाजन के बाद का भारत (सन् 1950 ई तक)। 

भारत के प्रागैतिहासिक कलाकेन्द्र जैसे मिर्जापुर, भीमबैठका, सयगढ़, बाँदा, पंचमढ़ी, होशंगाबाद इत्यादि सिन्धु घाटी, सभ्यता की कला (हड़प्पा और मोहन जोदड़ों) भारतीय चित्रकला के छः अंक जोगीमारा अजन्ता, बाघ, बाढ़ामी, एलोरा, सित्तनवासल इत्यादि के विभत्तिचित्र, भारतीय लघु चित्रकला (जैन, पाल, अपभ्रंश) राजस्थानी, शैली (बूढ़ी, कोटा, किशनगढ़, जयपुर इत्यादि) मुगल शैली (अकबर, जहांगीर, शाहजहॉ, औरगंजेब) पहाडी शैली (कांगड़ा, बसौली, इत्यादि) बंगालशैली और उसके कलाकर जैसे अवनीन्द्र नाथ ठाकुर, नन्द लाल बोस, असित कुमार हल्ढ़ार डी0पी0 राय चैधरी क्षितीन्द्र नाथ मजुमदार इत्यादि, समसामयिक चित्रकला और उसके मुख्य कलाकार, जैसे राजा रवि वर्मा, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, गगनेन्द्र नाथ ठाकुर, यामिनी राय, अमृता शेरगिल, एन0एस0बेन्दे, के0 के0 हेब्बर, के एस0 कुलकर्णी, एम0एफ0 हुसैन के0एच0 आरा इत्यादि। कला के तत्व जैसे रेखा , आकार वर्ण तान, पोत अन्तराल, चित्र संयोजन के सिद्धान्त जैसे-सहयोग, सामंजस्य संतुलन, प्रभावितलय अनुपात, परिप्रेक्ष्य और उसका चित्रकला में महत्व।

(अ) गायन

निम्न तकनीकी शब्दों की परिभाषा एवं व्याख्या संगीत, स्वर, सप्तक, शुद्व और विकृत स्वर, अलंकार, आलाप, विवादी, पकड़, राग, जाति, ओडव, सम्पूर्ण। ताल, मात्रा, लय तथा रोगों का परिचय, संगीत का इतिहास, विविध रोगों का अध्ध्यन विशेषता स्वर विस्तार एवं अलंकारो के माध्यम से रागों की बढ़त। रागों के आलाप, ताल, सहित लिपिबद्व करने की योग्यता। तालों का परिचय, गीतों के अलाप, तान सहित लिखना। स्वर समूह के छोटे-छोटे टुकड़ों के आधार पर राग पहिचानने की योग्यता।

(ब) वादन

संगीत स्वर (शुद्व एवं विकृत) अलाप, थाट, राग, आरोह, अवरोह, वादी संवादी पकड़, गत, टोडा, जमजमा, मात्रा, लय भरी, ठेका, समताल की परिभाएं एवं व्यवस्था, संगीत का इतिहस एवं रोगों का अध्ययन वादन, पाठ्यक्रमों के रागों की विशेषताऐ, रागों की गायकी का शास्त्रीय अध्ययन स्वर विस्तार एवं अलंकारों के माध्यम से राग की बढ़ता, तालों के टुकड़े, परन आदि लिखना, सरल स्वर विस्तार एवं तोड़ों के साथ गत के लिपिबद्ध करके लिखना। स्वर समूह के छोटे-छोटे टुकड़ों के आधार पर रागों की पहचान, ठेकं के कुछ बोलों के आधार पर तालों को पहचानने की योग्यता। तबला, पखावत या मृदंग, वीणा सितार, सरोद, सारंगी, इसराज या दिलरूबा, गिटार, वायलिन और बाँसुरी वाद्ययन्त्र। पारिभाषित व्याख्या-आलाप जोड़, अलाप, जमजमा, गमक, जवारी, तरप।

एकाउण्ट्स संख्यिकी एवं अकेक्षण-एकाउण्ट्स-पुस्तपालन का अर्थ उद्देश्य एवं विधियॉ, दोहरा लेखा प्रणाली, रोजनामचा, खाताबही तथा तलपट, समायोजन प्रविष्टियों के साथ अन्तिम लेखे तैयार करना, साझेदारी, खाते कम्पनी लेखे, अंशों का निर्गमन एवं हरण। और व्यापारिक संस्थाओं के लेखे अधिकार शुल्क, लेखे किराया-क्रय तथा प्रभाग क्रय संबधी लेखे सांख्यिकीय माध्य संगणियकी का अर्थ क्षेत्र, महत्व एवं सीमायें आकणों का सगंरह वर्गीकरण एवं सारणीयन सारिणयकीय अपकिरण, अंकेक्षण परिभाषा उद्देश्य, महत्व, प्रमाणन का अर्थ, महत्व, प्रमाणन के प्रकार प्रारम्भिक लेखे की पुस्तकों का प्रमाणन। अर्थशास्त्र, मुद्रा, बैंकिंग एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था-अर्थशास्त्र की परिभाषा एवं क्षेत्र उपभोग सीमान्त एवं कुल उपयोगिता, क्षेत्र एवं कार्य, पूंजीवाद एवं समाजवादी अर्थ व्यवस्था में मुद्रा का महत्व ग्रेशम का नियम मुद्रा का परिणाम सिद्धान्त, मुद्रा के मूल्य में परिर्वतन, बैकिंग के कार्य एवं प्रकार, वाणिज्यिक बैंक के सिद्धान्त रिजर्व बैंक आफ इण्डिया का कार्य,भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषतायें जनसंख्या की समस्या,कृषि की समस्या, विदेशी व्यापार संबंधी समस्या।

-सस्य विज्ञान का सिद्वान्न्त-परिभाषा, संकल्पना, विषय क्षेत्र और विकास, फसलों का वर्गीकरण, मिश्रित कृषि, शुष्क कृषि, फसल चक्र क्रमवार कृषि बहु फसल और अंतरिक फसल। -कृषि मौसम शास्त्र मौसम और ऋतुशास्य विकास को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय तत्व, मौसम पूर्वानुमान। खाद्यान्न, दाले, तिलहन, रेशेदार फसले, चारा फसले गाठदार एवं जड़वाली फसले और मुद्रादायनी फसलों की उत्पत्ति, इतिहास, वितरण, प्रकार, कृषिगत कार्य की प्रक्रिया। -पशु प्रजनन-प्रजनन का उद्देश्य प्रजनन की विधि, पशुओं की विभिन्न प्रजातियां चैपायों के चुनाव की विधि पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य देखभाल पोषण और स्वास्थ्य रक्षा।

सिलाइयाँ, डार्ट, प्लीट, टक्स सजावटी टाके आस्तिन पाकेट, कालर, कफ, प्लेट, वेल्ट वटल होल, पेंबन्द आदि, नाप-विभिन्न नाप लेने की पद्धतियां, सावधानियॉ आदि पेटर्न-पैटर्न के प्रकार, सामग्री ड्राफ्ट करने काटने, विछाने व रखने योग्य की सावधानियां, ट्रीमिंग-प्रकार व उपयोग, सिलाई-सिलाई का भवतव्य (भविष्य), वस्त्र का महत्व, सिलाई व्यवसाय का महत्व, सिलाई कटाई डिजाइजिंग में अन्तर, सिलाई मशीन विभिन्न प्रकार की मशीने, उनके पुर्जे, उनका उपयोग दोष व उपचार, मशीन अटैच मेन्टस, परिभाषिक शब्द-सिलाई व्यवसाय में आने वाले शब्दों की वयख्या, औजार-सिलाई, नापने काटने, प्रेस करने, ड्राफ्टिंग, चिन्ह लगाने के औजार व उपकरण, मानव आकृतिया-विभिन्न प्रेसिंग-विभिन्न पद्धतियां सावधानियां, उपयोगिता, आयरनिंग व प्रेसिंग में अन्तर कपड़ा-विभिन्न कपड़े पहिचान, चुनाव वर्गीकरण, श्रीकेज, परीक्षण फिटिंग व फिन्सिग-ट्रायल, दर्जियो के चिन्ह वस्त्र की विशेषता, डिजाइन स्टाइल व फैशन में अन्तर डिजाइन-तत्व, रेखा कला व वस्त्र का सम्बंध, डिजाइन के सिद्धान्त विक्रय-विक्रेता के गुण, विभिन्न ग्राहको से व्यवहार, वस्त्र कीमत निकालना, दुकान प्रबन्धन।

-सामान्य-कताई एवं बुनाई का इतिहास, चर्ख एवं करघे की उत्पत्ति एवं विकास, भारत में कताई एवं विकास। -साधन एवं इनके प्रकार टेक अप एवं टेक आफ गति के विभिन्न प्रकार हल्के मध्यम और भरी हस्त करघे उनका उपयोग, पावरलूम अंग कार्य चाले, सावधानियां कठिनाइयां एवं सुधार बुन कपड़े का दोष उनका पहचान एवं निदान। -बुनाई गणित-सूत का अंक, भार तथा लम्बाई का पैमाना, सूती, बस्टेड, लीनेन तथा स्पन सिल्क धागे का अंक लम्बाई भार निर्धारण एवं ज्ञान करने की विधिमिल,आदि।

शारीरिक शिक्षा के सिद्वान्त एवं शिक्षा मनोविज्ञान-परिभाषा, उद्देश्य, लक्ष्य, शारीरिक जैविक आधार वंशानुक्रम एवं वातावरण गुण पुरूष एवं महिला में अन्तर सेल्डन और कस्नर द्वारा वर्गीकरण, सामाजिक आधार-परिवार समुदाय, विद्यालय व्यक्तिगत अंतर, प्रेरणा सीखने का सिद्धान्त सीखने एवं सीखना स्थानान्तरित करने का नियम, शारीरिक शिक्षा के विशेष संदर्भ में। शारीरिक शिक्षा के संगठन विधि एवं पर्यवेक्षण संगठन का अर्थ और प्रशासन शारीरिक शिक्षा के महत्व एवं निर्देशन सिद्धान्त शारीरिक शिक्षा की सुविधां और उनका स्तर-खेल मैदान व्यायामशाला, यंत्र कर्मचारी और नेतृत्व समयसारणी का निमार्ण वित्त एवं बजट, विधि के अर्थ एवं महत्व तथा प्रभावित करने वाले तत्व पाठ्य निर्माण प्रतियोगिता और खेल कूद समारोह-लीग नाट, आउट इटयूरल तथा इक्ट्रामूरल दिवस।

 

सवाल और जवाब


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