‘द हिंदू’ संपादकीय (एडिटोरियल) अक्टूबर, 2017

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लास वेगास में नरसंहार : बंदूक के नियंत्रण पर लापरवाही का खतरा


बड़ी संख्या में हुई गोलीबारी से अमेरिका को बंदूक पर स्वामित्व विनियमन के लापरवाही के खतरे पर आवश्य जागृत होना चाहिए।


अमेरिका के लो‌कप्रिय लास वेगास शहर में बंदूक से लहूलुहान हिंसात्मक दृश्य देखने को तब मिला जब एक शूटर (निशानेबाज) ने संगीत समारोह के दौरान उमड़ी भारी भीड़ में गोली चलाई, जिसमें कम से कम 59 लोगों की मौत हो गई और 500 से अधिक लोग घायल हो गए। आधुनिक अमेरिकी इतिहास में यह गोलीबारी अब तक की सबसे भयावह गोलीबारी की घटना है। हालांकि इससे पहले जून, 2016 में ऑरलैंडो, फ्लोरिडा में नाइट क्लब में ऐसी ही गोलीबारी हुई थी, जिसमें 49 लोगों की मौत हो गई थी। पास के होटल के 32वें मंजिल में छिपा 64 वर्षीय स्टीफन पैडॉक ने 23 राइफलों के साथ इस घटना को अंजाम दिया। इसमें से कुछ राइफल स्वचालित और कुछ अर्द्ध स्वचालित राइफलें थी, जिन्हें ‘बंप स्कॉक्‍्स’ का इस्तेमाल कर उनकी फायरिंग गति को बढ़ाया गया था। पैडॉक इस घटना को अंजाम देने के बाद कमरे में मृत पाया गया। शुरुआत में, भ्रम की स्थिति थी कि इस घटना का इस्लामिक स्टेट से ताल्लुक है या नहीं। बाद में अमाक न्यूज एजेंसी का इसके पक्ष में दावा करने के बाद ये अटकलें आगे बढ़ी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पैडॉक का ऐसे आतंकवादी समूहों के साथ संबंध का कोई कथित प्रमाण नहीं था। इसलिए अमाक के दावे की प्रमाणिकता पर कई विशेषज्ञों ने सवाल भी खड़े किए कि पैडॉक का आईएस के साथ संबंध था या नहीं, लास वेगास में हुई शूटिंग (गोलीबारी) के दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘बंदूक नियंत्रण में सुधार’ की नीति जैसे मुद्दे को प्रकाश में ला दिया है।
अमेरिकी कांग्रेस में व्यावहारिक बंदूक नियंत्रण विनियमन में पंद्रह प्रयासों को दर्ज करने के बावजूद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने प्रशासन के आखिरी दिनों में शासनिक प्रक्रिया के जरिये बंदूक कानूनों में ‌कमियों को दूर करने का एक अंतिम प्रयास किया था। इसका उद्देश्य बंदूक के स्वामित्व के लिए पृष्ठभूमि की जांच को बढ़ावा देना, कानून को लागू करने वाली फेडरल एजेंसियों के लिए धन को बढ़ा देना एवं देशभर में मानसिक स्वास्‍थ्य की हालात में सुधार करना रहा। शुरुआत में, बराक ओबामा बंदूक की तेजी से बढ़ती संख्या को सख्ती से रोकने के प्रति महत्त्वाकांक्षी रहे जो‌ कि 2013 में सैंडी हूक एलिमेंट्री स्कूल में गालीबारी की घटना के बाद तेज हुई, लकिन कंजर्वेटिव कानून निर्माताओं द्वारा इसे तेजी से रोक दिया गया। इस बीच अमेरिकी कांग्रेस ने बदूक की ‌लापरवाही से सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने पर ज्यादा जोड़ नहीं दिया। वित्तीय रूप से समृद्ध नेशनल राइफल एसोसिएशन इसके पीछे एवं अनगिनत बंदूक निर्माताओं के द्वारा सदन में अपने पक्ष में जनमत तैयार करने के लिए कपटपूर्ण पैरवी की है। बड़े पैमाने पर गोलीबारी के बाद, एनआरए प्रवक्ता ने ‌दावा किया है कि बंदूक से मौत का एकमात्र कारण अधिक बंदूक का होना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बात करें तो, शायद वे अभी सबसे मजबूत सहयोगी ढूंढ़ रहे हैं। यद्यपि उन्होंने लास वेगास की घटना को ‘शैतानियत पर धुत कर्म’ बताया है। 2016 के अभियान के दौरान उन्होंने बंदूक लॉबी के हित में प्रचार किया था, जिसमें विशेषरूप से डर फैलाया था कि यदि डेमोक्रेटिक एजेंडा सफल हो जाता है तो ‘बहुत जल्द आप बंदूक लेने में सक्षम नहीं होंगे’। बंदूक लॉबी की पैदाइशी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक रुझान पर आधारित है, जिसका जिक्र अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन में है। जब तक अमेरिकी बंदूक स्वामित्व पर कठोर नहीं तो कम से कम उचित रोक नहीं लगाएंगे, तो वे इस प्रकार के बड़े पैमाने पर नियमित होने वाली त्रासदियों से नहीं बच सकेंगे।

 

 

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October 16, 2017

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