‘द हिंदू’ संपादकीय (एडिटोरियल)

एक निष्पक्ष इंटरनेट


बिना भेदभाव के सभी को इंटरनेट सुलभ कराने के लिए जारी संघर्ष के लिए 28 नवंबर, 2017 को आया फैसला स्वागत योग्य है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) अंततः नेट निष्पक्षता के पक्ष में स्पष्ट दिशानिर्देशों के साथ सामने आया जो कि फेसबुक के मुक्त आधारभूत प्रस्ताव के शुरुआती कदम के ढर्रे पर है। मई 2016 और इस वर्ष के जनवरी में परामर्श पत्र जारी होने के बाद प्राधिकरण ने इस बात को दोहराया कि सेवा प्रदाताओं के द्वारा इंटरनेट पर वेबसाइटों के लिए भेदभावपूर्ण तरीका नहीं अपनाया जा सकता है। विशेषकर ट्राई ने प्रदाताओं को कुछ वेबसाइटों को रोकने और कंटेंट की गति के साथ छेड़छाड़ को लेकर सचेत किया। संक्षेप में कहें तो इसका अर्थ यह है कि सेवा प्रदाताओं जैसे कि दूरसंचार कंपनियां ग्राहकों को ऐसे किसी कंटेंट तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं जो उनके लिए बिना किसी अनुचित रुकावट के उपलब्‍ध होना चाहिए। उदाहरण के लिए, वे उपभोक्ता को किसी निश्चित कंटेंट पर पहुंचने के लिए उससे शुल्क नहीं ले सकते और न ही एक वेबसाइट को दूसरी वेबसाइट पर तवज्जो देने का आश्वासन देकर उनसे भुगतान ले सकते हैं। उल्लेखनीय रूप से, ओबामा प्रशासन के दौरान सेवा प्रदाताओं पर लगाए गए नियमों को समाप्त करने के अमेरिकी संघीय संचार आयोग के फैसले पर अंतराष्ट्रीय फोकस के मद्देनजर ट्राई का फैसला आया है। हालांकि, मुक्त इंटरनेट के अधिकार की वकालत करते हुए, ट्राई कुछ अपवादों को अनुमति देने के प्रति सावधानी बरत रहा है जिसमें कंपनियों को ऐसे कंटेंट के बीच भेदभाव करने की अनुमति दी जाती है जहां उन्हें यातायात के प्रवाह को नियं‌त्रित करने में सुविधा हो रही हो या “विशेष सेवाएं” देने की स्थिति हो।

जहां एक ओर ट्राई के नए दिशानिदेर्शों से इंटरनेट को सर्वसुलभ तौर पर सार्वजनिक मंच बनाने में मदद मिलेगी, वहीं सेवा प्रदाताओं की चिंताओं को भी सिरे से नहीं नकारा जा सकता है। इंटरनेट का पूरी दुनिया में जितने बड़े स्तर पर प्रसार हुआ है, उसके चलते बहुत से लोगों का मानना है कि यह एक आधारभूत वस्तु है। लेकिन इंटरनेट के रीढ़ की तौर पर जो अवसंरचना होती है वह निजी सेवा प्रदाताओं के बिना संभव नहीं है। अतः कोई विनियमन जो कंपनी को निवेश पर पर्याप्त मुनाफा कमाने से काफी हद तक रोकती है, केवल लोकहित की कीमत पर ही आएगी। इस संबंध में, ट्राई एक अलग दृष्टिकोण को अपनाने के लिए स्वतंत्र है जो दर भेदभाव के सभी रूपों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय कंटेंट के विभिन्न रूपों के बीच अंतर करता है। उदाहरण के लिए, नई नीति, कंपनियों को अब भी उपभोक्ताओं को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराने में होने वाली लागतों को सही ठहराने की अनुमति देगा। ऐसे समय में, ट्राई की नपी-तुली प्रतिक्रिया से कुछ निश्चित प्रदाताओं द्वारा अपनाई गई प्रतिस्पर्धी-रोधी समस्या को प्रभावी तरीके से दूर करने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि, इसने महत्वपूर्ण चेतावनियों के साथ यह सरकार पर छोड़ दिया है कि वह इसे निर्धारित करे कि कौन-सी सेवा “विशिष्ट” है जिसके लिए नियामकों को असाधारण बर्ताव की जरूरत है। इस छोर पर, यह सुनिश्चित करने के लिए एक उचित तंत्र की स्थापना की जानी चाहिए, कि इंटरनेट के बड़े खिलाड़ियों द्वारा अपवाद के रूप चकमा नहीं दिया जा सके। विशेष हितों द्वारा विनियमन पर कब्जा करने से रोकने के लिए नीति निर्माताओं को भी उपयुक्त कानूनी ढांचा बनाने के बारे में सोचने की आवश्यकता होगी।


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