Editorials of leading newspapers is provided in Hindi to help students prepare for competitive exams. सुपरस्टार श्रीकांतः पेरिस की जीत ने उन्हे ख्यातिप्राप्त बैडमिंटन खिलाड़ियों की सूची में ला खड़ा किया है
गुंटूर में अपने पिता के धान के खेतों से सीधे सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट के शीर्ष मंच पर। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत का स्टारडम तक का सफर काफी लंबा रहा। पिछले रविवार पेरिस की जीत ने इस 24 वर्षीय खिलाड़ी को ऐसा चौथा खिलाड़ी बनने का रिकार्ड़ अपने नाम करने का मौका दिया, जिसने एक कैलेंडर वर्ष में 4 सुपर सीरीज पुरुष एकल खिताब (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क तथा फ्रांस) जीते। ओलंपिक रजत पदक विजेता पी.वी.सिंधू तथा एच.एस.प्रणोय वे अन्य खिलाड़‌ी हैं जो टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक अपनी जगह बना पाऐ। फाइनल मुकाबले में जापानी खिलाड़ी पर 21-14, 21-13 के आंकड़ों के साथ शानदार जीत, इस बात का संकेत है कि क्यों भारत धीरे धीरे स्पोर्ट्स में ग्लोबल पावर बनता जा रहा है।   वर्ष 2017 एक शानदार वर्ष रहा है श्रीकांत के लिए, जो कि अब अपने क्षेत्र के महान खिलाड़ियों के साथ सूची में पहुंच गऐ हैं, जैसे कि ओलंपिक स्वर्ण एवं रजत पदक विजेता चेन लॉग और ली चौंग वे तथा पूर्व विश्व चैंपयिन लिन डेन। संयोग से, श्रीकांत तथा प्रणॉय ने इन तीनों को ही पिछले कुछ वर्षों में हराया है। एक सप्ताह पूर्व ही श्रीकांत ने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी डेनमार्क के विक्टर एक्सल्सन को उन्हीं के घरेलू मैदान में हराकर उनका स्थान भी लिया है। श्रीकांत की शस्त्रागार में 380 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाला एक सटीक डाउन-द लाइन ट्रेडमार्क स्मैश भी शामिल है। सामान्य तौर पर शांत रहने वाले पुल्लेला गोपीचंद ने अपने शागिर्द को विश्व का सबसे बेहतर फास्ट कोर्ट का खिलाड़ी करार दिया है।   इस बदलाव के सबसे बड़े कारणों में से एक हाल ही में तैयार किए गए इन्डोनेशियाई कोच मुल्यो हेन्डोयो और उनकी टीम द्वारा प्रशिक्षण तकनीकों में नयापन है। युवा पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी अब धीरे-धीरे साइना नेहवाल और सिंधू की परछांई से निकलकर आगे आने लगे हैं और साथ ही साथ 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारत की ज्यादा से ज्यादा मेडल पाने की आशाएं भी बढ़ने लगी हैं। परन्तु भारत को अभी खुद को डबल्स इवेंट में बेहतर बनाने की जरूरत है यदि वह अपने को स्पोर्ट्स में शीर्ष देशों की सूची में चीन, इंडोनेशिया, डेनमार्क, मलेशिया तथा कोरिया के साथ खड़ा रखना चाहता है।   अंग्रेजी में संपादकीय पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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