Uttarakhand Public Service Commission (UKPSC)

उत्तराखण्ड लोकसेवा आयोग, हरिद्वार

  • उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 के द्वारा उत्तराखण्ड राज्य दिनांक 09 नवम्बर, 2000 को भारतीय गणतंत्र का 27वां राज्य बना।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 315 के अनुसार 14 मार्च, 2001 को जनपद हरिद्वार में उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग की स्थापना हुई।
  • आयोग द्वारा समय-समय पर विभिन्न सेवा एवं पदों पर भर्ती प्रक्रिया का आयोजन किया जाता है इन सेवा और पदों पर उत्तराखण्ड लोकसेवा आयोग द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाओं का संक्षिप्त रुप इस प्रकार है-:
  • सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ मुख्य परीक्षा, प्रवक्ता इंटरमीडिएट कालेज (विषय संस्कृत ), प्रवक्ता इंटरमीडिएट कालेज (विषय रसायन विज्ञान ), उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल जज जू.डि परीक्षा, डाटा एंट्री ऑपरेटर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, समूह ग स्क्रीनिंग परीक्षा, विधि आलेखक/अनुवादक/ पुनरीक्षक परीक्षा, सहायक लेखाकार/कनष्ठि संप्रेक्षक परीक्षा, सहायक कुलसचिव संस्कृत शिक्षा विभाग, वन क्षेत्राधिकारी परीक्षा, समूह ग साक्षात्कार परीक्षा, सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा

  • यहां पर प्रशासनिक सेवा में शैक्षणिक योग्यता में उम्मीदवारों के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री होनी चाहिए।
  • आयु सीमा न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है और अधिकतम उम्र 40 वर्ष होनी चाहिए तथा राज्य में विकलांगों को 10वर्ष की छूट निर्धारित  (आयु में सीमा में अलग-अलग पद और सेवाओं के अनुसार बदलाव संभव है) है।
  • तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बिजली, सड़क, लोक व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, आपूर्ति व्यवस्था, शिक्षा, कर, बाल और महिला कल्याण एवं एस.सी/ए.टी और पिछडा वर्ग कल्याण, पर्यटन, ग्रामीण विकास, परिवहन आदि पदों से सम्बन्धि कार्य की जिम्मेदारियां होती है उत्तराखण्ड प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, न्यायिक सेवा, खण्ड विकास अधिकारी, वाणिज्य कर अधिकारी, जिला पंचायत अधिकारी, सहायक क्षेत्रीय पंचायत अधिकारी, राज्य वित्त सेवा, जिला बाल विकास अधिकारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, असीस्टेन्ट रजिस्ट्रार परीक्षा, संयुक्त राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा, सहायक अभियोजन अधिकारी परीक्षा, आबकारी निरीक्षक, जिला आपूर्ति निरीक्षक आदि पदों में बिजली, सड़क, लोक व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, आपूर्ति  व्यवस्था, शिक्षा, कर, बाल और महिला कल्याण एवं एस.सी/एस.टी और पिछडा वर्ग कल्याण से सम्बन्धित कल्याणकारी कार्य से सम्बन्धित जॉब प्रोफाइल होते है जिसमें जिलें में प्रत्येक स्थान पर बिजली की आपूर्ती को संचालित करना, सड़क को बनाना और मरम्मत करवाना, नागरिकों को भय मुक्त और स्वतंत्र वातावरण देना, न्याय व्यवस्था को संचालित करना, शिक्षा संस्थानों में शिक्षा को सब तक पहुचांना और शिक्षा के स्तर को उठाना ताकि भावी पीढ़ियां अच्छी बने, जिले में कर का संग्रह करना, बाल और महिला कल्याण के कार्य सुचारु रुप से देखना तथा एस.सी/एस.टी और पिछडा वर्ग कल्याण, परिवन, पर्यटन जिला पंचायत आदि से सम्बन्धित कार्यो को पूर्ण करना होता है

  • लोक सेवा आयोग द्वारा की जाने वाली भर्तियों में वेतनमान (पे-स्केल) 9300 से 34800 है और ग्रेड-पे 4600 है जो अलग- अलग सेवा और पदों के लियें भिन्न भी हो सकता है।

सिविल सेवा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए निम्नलिखित अर्हता निर्धारित की गयी हैं-

1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U.G.C) की धारा 1956, द्वारा मान्यता प्राप्त, किसी राज्य अथवा केंद्रीय विश्वविद्यालय, या डीम्ड विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक अथवा समकक्ष की डिग्री।

2.एेसे छात्र जो स्नातक अथवा समकक्ष परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं या अंतिम वर्ष में हैं, वो प्रारंभिक परीक्षा में बैठ सकते है । लेकिन मुख्य परीक्षा में शामिल होने के पूर्व उन्हें आवेदन पत्र के साथ न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की डिग्री संलग्न करना आवश्यक है ।

3. विशेष परिस्थिति में आयोग एेसे छात्रों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकता है जो निर्धारित योग्यता धारण नहीं करते हैं लेकिन आयोग की नजर में उनकी डिग्री न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के समकक्ष है ।

4. पेशेवर और तकनीकी योग्यता वाले छात्र भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं ।

5.एेसे अभ्यर्थी जो M.B.B.S के Final में हैं या जिनकी इंटर्नशिप अभी पूरी नहीं हुई है वो भी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते हैं । लेकिन साक्षात्कार के दौरान उन्हें पूरी डिग्री साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष रखनी पड़ती है ।

एग्जाम पैटर्न


  • उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग की परीक्षा के तीन चरण है-
    1.प्रारम्भिक परीक्षा ( वस्तुनिष्ठ और बहुविकल्पीय)
    2.मुख्य परीक्षा  (व्याख्यात्मक, लिखित)
    3.साक्षात्कार
  • आयोग ने पीसीएस परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है नए पैटर्न में सिविल सर्विसेस एप्टीटयूट टेस्ट (सीसैट) को लागू कर दिया गया है और प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा मे वैकल्पिक विषयों को हटा दिया गया है।
  • अब सभी अभ्यर्थियो के पास प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा मे एक जैसे प्रश्न आएंगे। अब प्री.परीक्षा मे सामान्य अध्ययन के साथ सामान्य बुद्धीमत्ता का प्रश्नपत्र अनिवार्य कर दिया है जबकि मुख्य परीक्षा के दो वैकल्पिक विषय के चार प्रश्नपत्र और निबन्ध के प्रश्नपत्र के स्थान पर अब अनिवार्य प्रश्नपत्र को रखा गया है।
  • प्रारम्भिक परीक्षा में दो और मुख्य परीक्षा में सात विषय शामिल है - आयोग की ओर से पूर्व में करायी गयी पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में 25 विषय शामिल होते थे। मुख्य परीक्षा में 36 विषय सम्मिलित किए जाते थे।
  • अब नए पैटर्न से होने वाली प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अभिरुचि और सामान्य ज्ञान के दो प्रश्नपत्र होंगे। जबकि मुख्य परीक्षा में भारतीय इतिहास, भूगोल, भाषा, राजनीति और अर्थशास्त्र आदि 7 विषयों को शामिल किया गया है।
  • उत्तराखण्ड में सीसैट को यू.पी.एस.सी की तरह और उत्तर प्रदेश की तरह क्वालीफाइंग नहीं रखा गया है इसमें उत्तर लिखने के लिए खाली स्थान होगा। खाली स्थान में परीक्षार्थी को सार रूप में उत्तर लिखना होगा। इससे जहां परीक्षार्थी को निर्धारित शब्दों में उत्तर देने में आसानी होगी वहीं परीक्षक को उत्तर जांचने में आसानी होगी।

 

  • प्रारम्भिक परीक्षा में प्रश्नों की संख्या और समय सारणी
क्र. सं.प्रश्नपत्रप्रश्नों की संख्याअंकसमयावधि
1.प्रश्न पत्र प्रथम1501502 घंटे 
2.दूसरा प्रश्नपत्र1001502 घंटे

  • नये पैटर्न के अनुसार मुख्य परीक्षा में प्रश्नपत्रों की संख्या सारणी
क्र. सं.विषय प्रश्नपत्रअंकसमयावधि
1.भाषा (पहले सामान्य हिन्दी नाम था)1 प्रश्नपत्र300  3 घंटे
2.सामान्य अध्ययन (अंग्रेजी,गणित सहित अनिवार्य पेपर)6 प्रश्नपत्र200×63 घंटे (प्रत्येक में)
3.साक्षात्कार 200 
 कुल71700 

एग्जाम में सफल होने के लिए रणनीति, सुझाव और तरकीब

पाठ्यक्रम

  • मुख्य परीक्षा का पहला प्रश्नपत्र भाषा का, दूसरा प्रश्नपत्र भारत का इतिहास, राष्ट्रीय आंदोलन, समाज एवं संस्कृति का ,पहले इस प्रश्नपत्रमें मुख्यत: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पूछे जाते थे।
  • तीसरे प्रश्नपत्र में भारतीय राज व्यवस्था, सामाजिक न्याय एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध के सवाल पूछे जाएंगे।
  • चौथे प्रश्नपत्र में भारत एवं विश्व का भूगोल पूछा जाएगा, (पहले सिर्फ भारत का भूगोल रहता)था।
  • पांचवें प्रश्नपत्र में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के सवाल पूछे जाएंगे।
  • छठे प्रश्नपत्र में सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सवाल होंगे।
  • सातवें प्रश्नपत्रमें सामान्य अभिरुचि और आचार शास्त्र से जुड़े सवाल होंगे।
  • इन प्रत्येक प्रश्न पत्रों को हल करने के लिये 3 घंटे का समय दिय जायेगा।
  • नए पैटर्न से अधिक कुशल प्रशासक मिलेंगे - योग्य लोक सेवकों का चयन करने के लिये परीक्षा का पैटर्न बदला गया है
  • राज्य की सर्वोच्च सेवा में नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले, उत्कृष्ट, योग्यतम, उत्तरदायी, सत्यनिष्ठ,कुशल और योग्य लोक सेवकों का चयन करने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम निर्माण कराया गया है
  • इन परीक्षाओं में प्रश्नपत्र के साथ उत्तर पुस्तिका भी होगी।