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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में पूछे गए सवालों के जवाब पर प्रश्न खड़े हो गए हैं। पीसीएस-जे 2015 का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 2016 की भर्ती के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यार्थियों ने दो प्रश्नों के जवाब पर आपत्त‌ि जताई है। पीसीएस जे प्री की परीक्षा 16 अक्टूबर, 2016 को हुई थी। इस परीक्षा में इलाहाबाद, आगरा, लखनऊ और मेरठ में बनाए गए 85 परीक्षा केंद्रों पर 40,208 में 18,875 (46.95%) परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। आयोग ने विधि के पांच और जीएस के एक प्रश्न को हटाया है।

प्रश्न के उत्तर में दिए गए चार में से जिस विकल्प को सही माना है वह गलत है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अयोग द्वारा विधि के जिन पांच प्रश्नों को गलत मानते हुए हटाया गया है उनमें से भारतीय दंड सहिता 1860 की धारा 511 से संबंधित प्रश्न सही है। इसके जावजूद भी इसे बाहर कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने पीसीएस-जे प्रांरभिक परीक्षा-2015 का रिजल्ट भी संशोधित करने का आदेश दिया है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इस तरह की गड़बड़ियों के बावजूद गलत जवाब का विवाद बना हुआ है। बिशप जानसन केंद्र से परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों का कहना है कि लॉ के पेपर में दो प्रश्नों का सही जवाब दिए गए विकल्पों में ही नहीं था, इसके अलावा मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने से संबंधित सवाल लॉ के पेपर में पूछा गया जबकि अभ्यर्थियों का य‌ह मानना है कि मदर टेरेसा वाला प्रश्न सामान्य अध्ययन के पेपर में पूछा जाना चाहिए था।

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