उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र के मकोका कानून की तर्ज पर उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (यूपीकोका) लागू करने का फैसला किया है। यह मसौदा 13 दिसंबर, 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। यूपीकोका विधेयक को 14 दिसंबर, 2017 से शुरू हो रही शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।इस कानून के तहत अपराधी को कम से कम 7 साल की सजा व 15 लाख रूपये का जुर्माना वा अधिकतम सजा के तौर पर सजा-ए-मौत व 25 लाख का जुर्माना

किन किन आपराधों पर लगेगा यूपीकोका : फिरौती के लिए अपहरण, वन्यजीवों की तस्करी, नकली दवाओं के निर्माण या बिक्री, आतंकवाद, हवाला, अवैध खनन, वन उपज के गैरकानूनी ढंग से दोहन, अवैध शराब कारोबार, बाहुबल से ठेके हथियाने, सरकारी व गैरसरकारी संपत्ति को कब्जाने और रंगदारी या गुंडा टैक्स वसूलने सरीखे संगठित अपराधों में यूपीकोका लागू किया जाएगा।

UPCOCA Crime bill

आरोपी को खुद साबित करनी होगी अपनी बेगुनाही यूपीकोका में पुलिस पहले सुबूत जुटाएगी और गिरफ्तारी के बाद आरोपी को साबित करना होगा कि वह बेगुनाह है। सरकार के विरोध में होने वाले हिंसक आंदोलनों को भी इसके दायरे में लाया गया है। गवाहों की सुरक्षा का भी बंदोबस्त यूपीकोका में किया गया है। आरोपी यह नहीं जान सकेगा कि उसके खिलाफ किसने गवाही दी है। गवाही बंद कमरे में होगी और अदालत भी गवाह के नाम को उजागर नहीं करेगी। इतना ही नहीं आरोपी की शिनाख्त परेड आमने-सामने कराने के बजाए फोटो, वीडियो या फिर ऐसे पारदर्शी शीशों से कराई जाएगी जिसमें से अपराधी गवाह को न देख व पहचान सके। अभियुक्त को यह जानने का अधिकार नहीं होगा कि उसके खिलाफ गवाही किसने दी।

मीडिया ट्रायल को रोकने का भी होगा अधिकार इस नए कानून के तहत मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने का अधिकार विशेष अदालत को दिया जाएगा। इसके अलावा जिस पर यूपीकोका के तहत कार्रवाई होगी उस अभियुक्त को किसी स्तर पर यदि कोई पुरस्कार या किसी चीज का कांट्रैक्ट होगा तो उसे निरस्त कर दिया जाएगा।

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