साइबर अपराध के अंतर्गत कंप्यूटर एवं नेटवर्किंग शामिल है। कंप्यूटर के द्वारा किसी अपराध को किया जाना ही कंप्यूटर अपराध कहलाता है। जिसमें किसी व्यक्ति विशेष या संस्था की निजी जानकारी को चुराना, जानकारी को मिटाना, किसी की जानकारी को किसी दूसरे को देना, गलत ढंग से इस्तेमाल करना एवं किसी की जानकारी को फेरबदल करना भी साइबर अपराध के अंतर्गत आता है। साइबर अपराध भी कई प्रकार के होते हैं जैसे-

(1) हैकिंग- इंटरनेट संबंधी किसी की गुप्त जानकारी को हैक करना एवं उपयोगकर्ता के यूजर नेम और पासवर्ड में फेरबदल करना। (2) फिशिंग- किसी नेट यूजर के पास स्पैम ईमेल भेज कर उसकी गुप्त जानकारी को प्राप्त करना जिससे उसकी प्राइवेसी को नुकसान पहुंचाते हैं। (3) वायरस डालना- साइबर से संबंधित अपराध करने वाले लोग किसी के कंप्यूटर में ऐसे सॉफ्टवेयर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे होते हैं। जो कंप्यूटर को काफी हानि पहुचाते हैं। (4) स्पैम ईमेल- विभिन्न प्रकार के फर्जी ईमेल आते हैं जो कंप्यूटर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। (5) फर्जी बैंक कॉल- इसके अंतर्गत साइबर अपराधी लोगों को फर्जी मैसेज, कॉल करके लोगों से एटीएम नंबर और पासवर्ड मांगते हैं और फिर ऑनलाइन के माध्यम से लोगों के बैंक एकाउंट से पैसों की चोरी कर लेते हैं। लोगों को सदैव यह ज्ञात होना चाहिए कि बैंकों जनता से कभी भी ऐसी जानकारी नही मांगी जाती है और भूलकर भी अपनी किसी भी जानकारी को फोनकॉल, मैसेज एवे इंटरनेट के माध्यम से किसी को ना बताएं। (6) साइबर बुलिंग - फेसबुक एवं व्हाट्सऐप जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट भद्दे कंमेंट एवं मैसेज करना , इंटरनेट के माध्यम से धमकियॉ देना एवं इंटरनेट पर सभी के सामने किसी का मजाक करना साइबर बुलिंग के अंतर्गत आता है।


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